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उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट ..”शिकारी लखपत सिंह रावत ” 

उत्तराखंड के गावों में दहशत का माहौल बनाने वाली सबसे अधिक घटनाएँ आदमखोर गुलदार (तेंदुआ “Panthera pardus”) की होती हैं ! आये दिन जंगली जानवरों द्वारा उत्तराखंडी नौनिहालों महिलाओं व पुरुषों की जीवन लीला समाप्त कर दी जाती है ! दिन में दोस्तों के साथ खेलते बच्चे शाम अँधेरे में कब गुलदार का शिकार बन जाएँ यह कोई नहीं जानता ! गत वर्षों में गुलदारों
 द्वारा उत्तराखंड में सैकड़ों लोगों को निवाला बनाया गया है और सैकड़ों को गंभीर या आंशिक रूप से घायल किया गया है !

उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊँ क्षेत्र के मध्य स्थित गैरसैण के “ग्वाड़ मल्ला" गाँव के लखपत सिंह रावत जो कि पेशे से शिक्षक हैं, अब तक उत्तराखंड के पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और चम्पावत जिलों में 20 से अधिक नरभक्षी बाघों (तेंदुआ “Panthera pardus”) को मारकर क्षेत्र की जनता को आतंक से निजात दिला चुके हैं !

15 मार्च 2002 को आदिबद्री क्षेत्र में 12 बच्चों और एक महिला को अपना निवाला बना चुके एक नरभक्षी को मारकर लखपत सिंह रावत ने अपने शिकारी जीवन की शुरुआत की ! निशानेबाजी के शौकीन लखपत सिंह राइफल शूटिंग प्रतियोगिता में जिला स्तर तक पदक भी ले चुके हैं !

उत्तराखंड राज्य के चिन्हित शिकारियों की टीम में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और वे उत्तराखंड के एक अन्य मशहूर शिकारी ठाकुर दत्त जोशी की तरह ही उत्तराखंड में लोकप्रिय हो गए हैं ! उत्तराखंड को नरभक्षी गुलदारों से मुक्ति दिलाने वाले इस निशानेबाज को हमारा नमन है ! जय उत्तराखंड !!!


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