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पहाड़ी रायता !

मित्रों इन दिनों पहाड़ में झमाझम बारिश हो रही है, चारों और हरियाली छाई है, गाँव में हरी सब्जी प्रचुर मांत्रा में हुई है , लौकी, कद्दू, ककड़ी आदि जगहा जगहा पै लटके देखे जा सकते है, मुझे अक्सर पहाड़ की तजा सब्जी बहुत याद आती है ! दोस्तों आपने पहाड़ी ककड़ी का आनंद अवश्य लिया होगा, पहाड़ में खीरे को ही ककड़ी कहा जाता है, ककड़ी को काट के धनिया, हरी मिर्च और नमक को मिला के सिल बट्टे में 
पीस लिया जाता है, तयार हरे नमक के साथ आप ककड़ी का आनंद ले सकते है ! जब ये ककड़ी पक जाती है, तो उनका स्वाद हल्का सा खट्टा हो जाता है, आमतौर पै इनका रंग दो तरह का होता है, लाल और पीला,लाल में चितकबरा रंग भी पाया जाता है, जब ककड़ी हल्की हल्की पिली हो जाती है तो इससे रायता बनाया जाता है,
रायता बनाने के लिए ककड़ी को सबसे पहले कद्दूकस कर लिया जाता है, एक वर्तन में दही को फाट लिया जाता है, फिर उसमे कद्दूकस की हुई ककड़ी से पानी को निठार कर मिलाया जाता है, इसमें खासतौर से तयार की गई नमक, इसमें, हरी मिर्चं, धनिया, राई के दाने (राई सरसों की तरहा छोटे छोटे दानो वाली होती है ) नमक आदि मिला के बनाया जाता है, अच्छे से मिला के रायता तयार हो जाता है ! मुझे पहाड़ का रायता बेहद पसंद रहा है, बचपन में अक्सर श्राद्ध आदि में खूब रायता खाने को मिलता था !
इसके अलावा पकी हुई ककड़ी से बड़ी भी बनाई जाती है ! इसके लिए रात भर उड़द की डाल को रात भर भिगोने में भिगाने के लिए रखा जाता है, फिर उसे पीस लिया जाता है, ककड़ी को अच्छे से कद्दूकस करके पीसी हुई उड़द के साथ मिला लिया जाता है, छोटी छोटी पकोडिया की शक्ल में छत पै सुखा लिया जाता है, बाद में आप इससे मनचाहे रूप में बना सकते है ! मुझे बड़ी की सब्जी बेहद पसंद रही है ! आज भी पहाड़ से बड़ी अवश्य मंगाता हूँ !
अल्मोड़ा की तरफ जाते वक़्त गरमपानी में आपने इस रायते का आनंद अवश्य लिया होगा ! उसमे पड़ने वाला राई पुरे सफ़र की थकान एक मिनट में छूमंतर कर देता है !
आप भी अपनी यादें साँझा कीजियेगा !


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