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सोड़ा गांवः फिर से सजने लगी चौपाल

गांवों की दशा सुधारने के लिए एक आंदोलन की ज़रूरत है. ऐसा आंदोलन, जो ग्रामसभा को मज़बूत बनाए और पंचायती व्यवस्था में जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित कर सके. ऐसा आंदोलन किसी राजनीतिक दल से नहीं निकल सकता, क्योंकि उसके अपने निहित स्वार्थ होते हैं. सांसद या विधायक बनकर देश सुधारने का दम भरने वाले आवेशित युवाओं के बल पर भी यह आंदोलन नहीं खड़ा हो सकता. इसके लिए ज़रूरत है ऐ
से लोगों की, जो अपने गांव को राजनीतिक रूप से सुधारने के लिए काम करें. मसलन, छवि राजावत, जो एमबीए की पढ़ाई करने के बाद भी अपने गांव आती हैं और उसके विकास के लिए काम करती हैं.


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