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गंगोत्री नेशनल पार्क ने गोमुख ट्रैक को पर्यटकों के लिए खोल दिया है, लेकिन ट्रैक फिलहाल आवाजाही के लायक नहीं है। इस पर कहीं विशाल हिमखंड पसरे हुए हैं, तो कहीं रास्ता पूरी तरह ध्वस्त है। ऐसे में केवल सुरक्षा के उपाय साथ लेकर चलने वाले पर्यटक ही गोमुख तक पहुंच सकते हैं।
गंगोत्री से 18 किलोमीटर दूर गोमुख श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र होने के साथ ही रोमांच के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। गंगोत्री ग्लेशियर के इस मुहाने से आगे तपोवन, कालिंदी पास, उडनकोल जैसे उच्च हिमालयी ट्रैक रूट निकलते हैं। वहीं, गंगोत्री क्षेत्र के हिमशिखरों पर जाने वाले पर्वतारोही दलों को भी गोमुख ट्रैक पार करना पड़ता है। गंगोत्री नेशनल पार्क के कोर जोन में होने के कारण पार्क प्रशासन इस क्षेत्र में मानवीय आवाजाही को नियंत्रित करता है। सर्दियां बीतने के बाद पार्क प्रशासन ने पार्क को पर्यटकों के लिए खोलने की घोषणा कर दी है, लेकिन फिलहाल ट्रैक बेहद जोखिम भरा है। पार्क के कर्मचारियों ने हाल ही में पूरे ट्रैक का मुआयना किया। उनके मुताबिक गंगोत्री धाम से तीन किलोमीटर दूर कनखु बैरियर के बाद ट्रैक पर देवगाड में भारी हिमखंड हैं, जबकि कच्चा ढांग व भुजगढ़ी में हिमस्खलन के कारण करीब सौ मीटर ट्रैक पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। इन जगहों पर गंगोत्री नेशनल पार्क के कर्मचारियों ने सहारे के लिए रस्सी डालकर फौरी इंतजाम किया है। ट्रैक की इस हालत कोदेखते हुए केवल पर्वतारोही दलों व सुरक्षा का पूरा साजो सामान लेकर जाने वाले ट्रैकिंग दलों को ही परमिट जारी करने का निर्णय लिया गया है। ट्रैकिंग दलों के साथ गाइड, पोर्टर, मेडिकल स्टाफ की अनिवार्यता भी रखी गई है।
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एडवांस परमिट जारी नहीं हुए
गोमुख ट्रैक पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन अभी तक परिमट के लिए एडवांस बुकिंग नहीं हो सकी है, जबकि बीते साल तक मार्च में ही अप्रैल, मई व जून तक के लिए पूछताछ व बुकिंग का सिलसिला शुरू हो जाता था। ट्रैक खोलने के पहले दिन भी कोई परमिट जारी नहीं हो सका।
'गोमुख ट्रैक पर फिलहाल काफी खतरा है, लेकिन पर्वतारोही दल व सुरक्षा के लिए पूरा साजो सामान ले जाने वाले ट्रैकिंग दल इस पर आवाजाही कर सकते हैं, ऐसे दलों को पूरे निरीक्षण के बाद परमिट जारी किये जा रहे हैं
-जीएन यादव, उपनिदेशक, गंगोत्री नेशनल पार्क।


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