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करोड़ों हिंदुओं
की आस्था के
प्रतीक केदारनाथ मंदिर
के कुछ महत्वपूर्ण राज
पहली बार उजागर
हुए हैं। भारतीय
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग
(एएसआई) को मंदिर के
11-12वीं सदी में निर्मित होने प्रमाण मिले
हैं।
केदारनाथ मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए
अक्षरों (पुरालेखों) के अध्ययन के बाद विभाग इस निष्कर्ष पर
पहुंचा। मंदिर की दीवारों पर प्रारंभिक
नागरी व नागरी में लिखे अक्षर मिले,
जो 11-12वीं सदी में
ही लिखे जाते थे।
गौरतलब है कि पिछले साल जून में आई प्राकृतिक आपदा के बाद
केदारनाथ मंदिर के भीतर जमकर मलबा भर गया था।
एएसआई को मलबे की सफाई के दौरान मंदिर
की दीवारों पर जगह-जगह अक्षर
(पुरालेख) गुदे हुए मिले, जिनके अध्ययन के लिए मैसूर से विभाग
की इफिग्राफी ब्रांच के विशेषज्ञ बुलाए गए
थे।
इफिग्राफी ब्रांच के निदेशक डॉ. रविशंकर
की ओर से अध्ययन रिपोर्ट तैयार कर विभाग के
महानिदेशक व क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून
को भेजी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुरालेख
प्रारंभिक नागरी व नागरी में दर्ज हैं, जिससे
माना जा सकता है कि मंदिर
11-12वीं सदी में अस्तित्व में आया।
विशेषज्ञों ने चिंता भी जाहिर
की कि पुरालेखों में किसी तारीख
का उल्लेख नहीं मिला। न
ही किसी राजवंश का नाम
दीवारों में दर्ज पाया गया।
महत्वपूर्ण तथ्य यह भी पता चला कि यह पुरालेख
मंदिर में आने श्रद्धालुओं या आमजन का है।
इनकी लिखावट आड़ी-
तिरछी पाई गई, क्योंकि किसी राजा या खास
पुरालेख में बनावट आदि का विशेष ख्याल रखा जाता था। पुरालेखों में दान
देने, भगवान को नमन करने व मंदिर तक सकुशल पहुंचने
आदि का जिक्र मिला है।
अब तक मंदिर निर्माण की मान्यताएं
एक मान्यता के अनुसार केदारनाथ मंदिर
को आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य ने
बनवाया था, जबकि राहुल सांकृत्यायन द्वारा लिखित अभिलेखों में मंदिर
को 12-13वीं शताब्दी का बताया गया।
वहीं, ग्वालियर में मिली एक राज भोज
स्तुति में मंदिर को 1076-99 काल का माना गया। पांडव या उनके
वंशज जनमेजय के समय भी मंदिर निर्माण
की बात सामने आती है।
जय केदार जय उत्तराखण्ड।
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