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धारचूला दौरे से खड़े हुए सवाल
प्रदेश की राजनीति में चल रही उठापटक के बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत का 21 मई का धारचूला दौरा कई सवाल छोड़ रहा है। राजनीतिक हलकों में मुख्यमंत्री के धारचूला से चुनाव लड़ने की बात है।
धारचूला मुख्यमंत्री के लिए सुरक्षित सीट मानी जा रही है। मुख्यमंत्री बनते ही रावत ने धारचूला आने में तत्परता दिखाई थी। खराब मौसम ने तीन बार उनकी राह रोकी, लेकिन चौथी बार मुख्यमंत्री धारचूला पहुंचे।
हरीश रावत के धारचूला से चुनाव लड़ने की अटकलें उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही लगाई जाने लगी थी।धारचूला विधायक हैं हरीश के खास
धारचूला के विधायक हरीश धामी मुख्यमंत्री के खासमखास माने जाते हैं। वह कई बार मुख्यमंत्री के लिए सीट छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं। एक फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले रावत के सामने छह माह के भीतर विधायक बनने की संवैधानिक बाध्यता है।
26 फरवरी को धारचूला पहुंचे मुख्यमंत्री को विधायक हरीश धामी ने वहां से चुनाव लड़ने का आमंत्रण दिया था। मुख्यमंत्री ने इसे धामी की उनके प्रति सदभावना बताया था।
हालांकि धारचूला विधानसभा क्षेत्र जून 2013 की आपदा से सर्वाधिक पीड़ित रहा है। वहीं धारचूला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने भाजपा पर 2520 वोटों की बढ़त बनाई। इस लिहाज से भी धारचूला कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट मानी जा रही हैमुख्यमंत्री जब चाहें तब खाली कर दूं सीट'
धारचूला के विधायक हरीश धामी मुख्यमंत्री के धारचूला से चुनाव लड़ने के सवाल पर कहते हैं कि मुख्यमंत्री जब चाहें वह उनके लिए सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं।
धामी का कहना है कि बुधवार को मुख्यमंत्री आपदा राहत कार्यों की समीक्षा करने के लिए आ रहे हैं। मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि आपदा राहत कार्य में किसी तरह की ढिलाई हो।


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