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हिन्‍दी का अर्थ और उसका स्‍वरूप--
हिन्‍दी शब्‍द की व्‍युत्‍पत्ति-- हिंदी शब्‍द का संबंध '' सिन्‍धु'' शब्‍द से माना जाता है, जो संस्‍कृत में द्रविड या किसी अन्‍य पूर्ववर्ती भाषा से आया है। ''सिन्‍धु'' वर्तमान सिंध नदी को कहा जाता है। उसके आस-पास के क्षेत्र को भी सिन्‍धु कहा जाने लगा। सिन्‍धु शब्‍द ईरानी में जाकर हिन्‍दु और फिर हिन्‍दी हो गया ( भारत के पश्चिम भाग, विशेष रूप से जौधपुर , जैसलमेर, बाडमेंर जिलों में आज भी फारसी भाषा के प्रभाव से -- स-- ध्‍वनि -- ह-- में बदल जाती है-- सप्‍ताह-- हफताह, सडक--हडक, सीरा-- हीरा, केसरी-- केहरी। बाद में इस शब्‍द का विस्‍तार होने लगा और हिंद शब्‍द पूरे भारत देश का वाचक हो गया। यहॉं के वासी तथा भाषा दोनो के लिए-- हिंदी शब्‍द प्रयुक्‍त होने लगा। यह हिंदी शब्‍द ईरानी प्रत्‍यय लगने से हिंदीक बना था जिसका अर्थ होता है हिंद का। बाद में इसे परिवर्तित रूप हिंदी बना था।।
हिन्‍दी भाषा का विकास--- हिन्‍दी का जन्‍म भारोपीय परिवार--सतम-- भारत ईरानी-- प्राचीन भारतीय आर्य भाषा-- संस्‍कृत-- मध्‍यकालीलन एवं आर्यभाषा पालि-- प्राकृत अपभ्रंश-- शौरसेनीएंव मागधी-- अदर्ध मागधी अपभ्रंश की पृष्‍ठभूमि में हुआ और बॉगरू एवं ब्रज और खडी बोली से उसका मानक रूप विकसित हुआ ।।
हिन्‍दी का जन्‍म काल 1000 ई के आस-पास माना जाता है ।।


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