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गैरसैंण को लेकर उत्तराखण्ड सरकार सरकार ने एक हफ्ते में दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पहला गैरसैंण अवस्थापना विकास परिषद् का गठन और दूसरा गैरसैंण में 9- 12 जून तक विधानसभा सत्र का आयोजन। गैरसैंण जैसा कि सर्व विदित है उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन से जुडा सवाल है, जिसका अर्थ राज्य की सांस्कृतिक एकता, भौगोलिक स्थिति, नीति व निर्णयों के लिए स्थलीय परिस्थितियां और वे तमाम चीजें थी जो राज्य आन्दोलन में तय हो गयी थी।
सन् 1991 से गैरसैंण राजधानी की चर्चा में हैं तब 19 नवम्बर 1991 को उ प्र की भाजपा नीत कल्याणसिंह सरकार ने यहां अपर शिक्षा निदेशालय पर्वतीय का उद्घाटन किया था। गैरसैंण में यदि किसी समारोह की दृष्टि से देखें तो जनता के उस बेमिसाल उत्साह का रिकार्ड अब तक नहीं टूटा हैं। कहना न होगा कि जनता के उस अपार जन समूह की उपस्थिति का भाजपाइयों ने निरादर किया और अपर निदेशालय वहां नहीं है। 25 जुलाई 1992 में उत्तराखण्ड क्रांति दल ने गैरसैंण के 50गुणा30 वर्ग किमी क्षेत्र को पेशावर विदोह के अमर सेनानी वीर चनद्रसिंह गढवाली के नाम पर चन्द्रनगर नाम देते हुए उत्तराखण्ड की राजधानी का औपचारिक शिलान्यास कर राजधानी के सवाल को हल कर दिया।
गैरसैंण का विधायी और संसदीय नेतृत्व कमोवेश भाजपा के हाथों में रहा और कहना न होगा कि गैरसैंण राजधानी के सवाल से वह सहमत नही रही और गैरसैंण के विकास को पलीता लगाने का ही काम किया। राज्य गठन के समय यदि भाजपा उ प्र राज्य पुनर्गठनविधेयक 2000 में राजधानी का सवाल नही लटकाती और असुविधाओं के बीच भी गैरसैंण से काम करती तो राज्य की जो दुर्दशा आज है वह शायद नहीं होती और राज्य आन्दोलन की भावनाओं का सम्मान हो पाता।
कांग्रेस सरकार के फैसले निश्चित रुप से लोकसभा में हुई बूरी हार के बाद आये हैं लेकिन गैरसैंण में विधान सभा निर्माण और विधान सभा सत्र का वादा हार से पहले का है। गैरसैंण का अवस्थापना विकास हुए बिना राजधानी कल्पना ही लग सकती है। वहां सडक, बिजली, पानी, चिकित्सा,शिक्षा,संचार आदि की स्थिति आम उत्तराखण्ड की तरह बद और बदतर हैं। गैरसैंण अवस्थापना विकास यदि वास्तव में कुछ कर सके तो यह न केवल गैरसैंण बल्कि उत्तराखण्ड के लिए मील का पत्थर बन सकता है।
मित्रों! आप जानते हैं राज्य अवधारणाओं पर जो पलीता भाजपा ने लगाया कांग्रेस ने उस कालिख को पांलिस का चमकाया ही। दोनों उत्तराखण्ड के लिए नागनाथ और सांपनाथ से कम नहीं हैं। गैरसैंण में विधान सभा बनाने की बात डेढ साल से है। शिलान्यास, भूमि पूजन और आज- अभी से काम शुरु होने की घोषणाऐं सब खोखली हैं। विधानसभा के नाम पर एक ईट नहीं है। भराडीसैंण के पास के तीन पोलिंग बूथों में भाजपा को अधिक वोट मिला है जिसका साफ अर्थ है की जिन गांवों ने विधानसभा की भूमि पूजन में बाजे गाजे के साथ शिरकत की उन्हें सरकार की कथनी- करनी पर विश्वास नहीं है।
शुरुआत कहीं से होनी है यदि कांग्रेस सरकार और मुख्य रुप से हरीशरावत व गोविन्दसिंह कुंजवाल प्रतिबद्धता से गैरसैंण राजधानी के लिए काम करते हैं तो उसका स्वागत होना चाहिए।


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