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उत्तराखण्ड विकास पार्टी का स्पष्ट रूप से मानना है की उत्तराखण्ड का विकास केवल उत्तराखण्ड के निवासियों के हाथों में है |भारत सरकार उत्तराखण्ड की केवल मदद कर सकती है विकास नहीं | विकास के लिए उत्तराखण्ड के निवासियों को ही हाथ पांव हिलाने होंगे | उदाहरनार्थ ...( A )2008 में केन्द्र की ईएसआई ने एक मेडिकल होस्पिटल ,डेंटल होस्पिटल ,नर्सिंग ट्रेनिंग कॉलेज और एक सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के लिए 23 सौ करोड़ रुपैये स्वीकृत किये था ( संज्ञान लें एम्स का बजट 800 करोड़ है ) 2008 से आज तक राज्य सरकार हरिद्वार में ईएसआई इस संस्थान के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं करा पाई है | ऐसा सुनने में आया है की केद्र सरकार ने वो बजट अब कहीं और शिफ्ट कर दिया है | (B ) कोटद्वार ग्रामीण विकास संस्थान 2005 से जमीन के इंतजार में खड़ा रह गया और शिफ्ट हो कर राजस्थान में खुल भी गया .अब भी नेताजी कह रहे हैं की अधिकारीयों को निर्देश दे दिए गये हैं |(C ) कोटद्वार मेडिकल कॉलेज गायब हो गया है |
(D ) विशेष हिमालयी राज्यों के लिए बागवानी विकसित करने के लिए उत्तराखण्ड को 90 करोड़ मिले जिसकी पहली क़िस्त 30 करोड़ की स्वीकृत हुई | 2008 से 13 तक मात्र 11 करोड़ खर्च हो पाए | वस्तुत: यह धन किसानो को बाटा जाना था इनसे वो काम भी नहीं हो पाया |21 करोड़ तो लैप्स हुए ही साठ करोड़ भी हाथ से निकल गये (E ) कम्प्यूटर के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार ने करोड़ो का अनुदान घोषित किया ..यहाँ लेने वाला नहीं मिला | हिलट्र|न जैसे संस्थान ने जिसे एक बार में करोडो स्वीकृत हो जाते आवेदन तक नहीं किया | (f ) पाबो पैठनी के आई टी आई को सन २०११ में केन्द्र से मिले साठ लाख रुपैये लैप्स हुए जो आई टी आई के उपकरण खरीद के लिए थे |(g) हमारे आई ए एस राज्य के विकास के कार्यों के लिए मांगे जाने वाले पैसो के प्रति बिलकुल उदासीन हैं और केन्द्र में राज्य का पक्ष ढंग से नहीं रखते | ग्रामीण विकास की ऐसी ही एक हाई प्रोफाइल मीटिंग में प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा सही रिपोर्ट ना रखे जाने पर केन्द्रीय सचिव ने मुख्य सचिव की क्लास ले ली | जब बहाने बाजी ज्यादा हुई तो केद्रीय सचिव ने मुख्य सचिव को हडकाते हुए कहा ..मुझे मत बनाओ ..मुझे पता है वहां क्या स्थिति है ..मैं भी वहीँ का रहने वाला हूँ इसलिए मुझे ये गलत बातें बहुत चुभती हैं ......धन्यवाद मित्रो ...आपकी आलोचनाओ के इंतजार में


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