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सुअरों का स्वर्ग

उत्तराखंड पर्यटन का स्वर्ग हो न हो पर सुअरों का स्वर्ग जरूर है।आइये एक ऐसे ही स्वर्ग से आपको रूबरू करवाते हैं। 
आप अगर कभी हल्द्वानी आयें जिसे ग्रिन सिटी कहलाने की बड़ी जल्दी थी, आज यहां एक जगह सुअरों का खास स्वर्ग है- वह है लालडंाठ। यहां 24 घंटे यातायत बना रहता है। यहां से माननीय, अमाननीय, नौकरषाहों, की षानदार ए सी कारें भी गुजरती हैं। इस डांठ पर कूड़े के ढेर निरंतर षैतान की तरह आपका स्वागत करने के लिए बेताब रहते हैं। अगर आप विभत्स एडवेंचर गेम के उत्सुक हों तो यहां पंाच मिनट आप रूक जाये तो आप वाकई इन गेमों के लिए क्वालीफाई करते हैं। पर यहां आसपास रहने वाले लोग, इस बदबू सड़ांध के इतने एक्यूमैटलाइज्ड हो गये हैं कि उनके अंदर ऐसी एंडीबाडीज का निर्माण हो गया है कि उन्हें यह नरक रास आ गया है। ऐसे स्थल उत्तराखंड में बहुत से हैं। एक महोदय कह रहे थे इनका उद्धार तभी होगा जब इन सब कूड़ा संग्रहालयों के नाम किसी नेता के नाम हो जायें। 
इस स्थल पर कार वाले रात ग्यारह बजे नाइट वाक में आते हैं और खिड़की खोल कर अपने कूड़े को यहां डाल आते हैं। सुअरों को अभी इस अपने स्वर्ग का पता नहीं है। वरना कहते हमीअस्त हमअस्त यानी स्वर्ग है तो यही है यही है....। 
एक समाजसेवक सुनील कांडपाल जी ने इस हल्द्वानी के कंलक का उद्धार करने का बीड़ा उठाया है। इसके पहिले की सुअर उनके खिलाफ हो जायें अगर आप चाहें तो उनका सहयोग कर सकते हैं। देष दुनिया का तो कभी उद्धार हो ही जायेगा आपके रोज रोज के रास्ते का उद्धार आपका इंतजार करता है।


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