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क्या आपको पता है कि अलग राज्य के लिए क्या क्या कब कब हुआ और क्या ये लोग राज्य आन्दोलनकारी नहीं थे ..ये तो तब थे जब आज के तथाकथित आन्दोलनकारी पैदा भी नहीं हुए थे :
1938 में श्रीदेव सुमन द्वारा दिल्ली में गढ़ देश सेवा संघ की स्थापना की गई | इसे बाद में हिमालय सेवा संघ का नाम दिया गया | 5 व 6 मई को श्रीनगर में आयोजित कांग्रेस पार्टी के सम्मलेन में उत्तराखण्ड के लिए एक प्रथक प्रशासनिक व्यवस्था का प्रस्ताव पारित किया गया |
1946 में कुमाऊ केसरी बद्री दत्त पाण्डेय ने पर्वतीय क्षेत्र के लिए अलग प्रशासनिक इकाई की मांग की |
1952 में पी सी जोशी ने प्रथक राज्य की मांग का ज्ञापन भारत सरकार को सौंपा |
1952 में ही वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली ने जवाहर लाल नेहरू के समक्ष योजना का प्रारूप रखा |
1954 में विधान परिषद सदस्य इन्द्र सिंह नयाल ने पर्वतीय क्षेत्र के विकास हेतु अलग प्रबंधन के लिए तत्कालीन मुख्य मंत्री को पत्र लिखा |
1957 में टिहरी रियासत के महाराजा मानवेन्द्र शाह ने प्रथक राज्य के लिए आन्दोलन शुरू किया व प्रवासी लोगों से भी संपर्क स्थापित किया |
1957 में उत्तराखण्ड राज्य परिषद की स्थापना हुई जो कुछ समय बाद टूट गई |
1967 रामनगर में पर्वतीय राज्य परिषद का गठन हुआ |
1968 हिमालय बचाओ आन्दोलन के जनक श्री ऋषि बल्लभ सुन्द्रियाल जी के नेतृत्व में दिल्ली में प्रथक राज्य की मांग के लिए प्रदर्शन हुआ |
1970 में पीसी जोशी ने राष्ट्रीय मोर्चा का गठन किया और प्रथक राज्य की मांग दोहराई |
1972 में उत्तराखण्ड राज्य परिषद् के कार्यकर्ताओ ने वोट क्लब पर धरना दिया |
1973 पर्वतीय विकास मन्त्रालय के रूप में बहुगुणा जी ने प्रथक मंत्रालय का निर्माण किया अलग बजट का प्रावधान वस्वतंत्र मंत्री बने | प्रथक राज्य निर्माण की मांग के लिए बदरी नाथ से वोट क्लब तक विधायक प्रताप सिंह नेगी जी के नेतृत्व में एक विशाल पद यात्रा हुई |
1976 उत्तराखण्ड युवा परिषद का गठन हुआ और 1978 में परिषद के सदस्यों ने संसद का घेराव किया व गिरफ्तारियां दी |
1979 सांसद त्रेपन सिंह नेगी जी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य परिषद् की स्थापना व 23 जुलाई को वोट क्लब में रैली कर तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को अलग राज्य की मांग के लिए ज्ञापन दिया गया |
1979 25 जुलाई को मसूरी में पर्वतीय विकास सम्मलेन में उत्तराखण्ड क्रांति दल का जन्म हुआ |जिसके अध्यक्ष कुमाऊ विश्व विद्यालय के तत्कालीन कुलपति श्री देवी दत्त पन्त बने व एक सूत्री लक्ष्य उत्तराखण्ड में समस्याओ का निराकरण करते हुए अलग राज्य की स्थापना करना था |
1984 में आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन ने प्रथक राज्य की मांग को लेकर गढ़वाल में 900 किलोमीटर की सायकिल यात्रा की |


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