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बहुगुणा सरकार के कुशासन के दंश से केदारनाथ त्रासदी के एक साल बाद भी शर्मसार हुआ फिर उत्तराखण्ड
भले ही उत्तराखण्ड की सत्ता से बहुगुणा के कुशासन का अंत कई माह पहले हो गया है परन्तु बहुगुणा कुशासन के दंश से आज भी उत्तराखण्डियों को शर्मसार होना पड रहा है। गत वर्ष 16 जून को केदारघाटी सहित पूरे उत्तराखण्ड में आयी त्रासदी के बाद राहत व बचाव कार्य में जिस संवेदनहीनता व घोर लापरवाही का जो तांडव तत्कालीन बहुगुणा सरकार ने मचाया था उसके दंश से इस आपदा की पहली बरसी के समय बडी संख्या मेंइस त्रासदी के शिकार हुए लोगो के मिल रहे कंकाल से पूरे विश्व में उत्तराखण्डियों का सर शर्म से झुक गया। लोग हैरान है कि जो सरकार एक साल तक इस छोटी सी घाटी में आस पास बिखरे पडे शवों को ढूंढ का दाह संस्कार करने का कार्य तक नहीं कर पायी थी उस सरकार ने आपदा पीड़ितों का क्या बचाव किया होगा व क्या राहत दी होगी। इस विश्व को गमगीन करने वाली इस त्रासदी से तबाह हुए विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा एक महीने तक कदम रखने की सुध व साहस तक नहीं जुटा पाये। अगर आपदा के तुरंत बाद विजय बहुगुणा वर्तमान मुख्यमंत्री की तरह शवों को खोजने का अभियान युद्धस्तर पर जुटाते तो आज प्रदेश को इतना शर्मसार नहीं होना पड़ता और इस त्रासदी में मारे गये श्रद्धालुओं के शवों को अंतिम संस्कार के लिए इतनी लम्बी इंतजारी नहीं करनी पड़ती। यही नहीं अगर तुरंत बाद सघन तलाशी अभियान चलाया जाता तो हो सकता है जंगलों में भटक् रहे कई लोगों की जान भी बच सकती थी। लोग उस घडी को व कांग्रेसी नेतृत्व को भी कोस रहे है जिन्होंने जब मुख्यमंत्री के रूप में विजय बहुगुणा जेसे नेता को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। अगर उस समय हरीश रावत ही मुख्यमंत्री होते तो राहत, बचाव व पुनर्वास कार्यो में इतनी बदइंतजामी नहीं होती। प्रदेश अपने आप को अनाथ व असहाय नहीं समझता। सबसे हैरानी उन बुद्धिजीवियों, संगठनों व नेताओं पर होती है जो इस त्रासदी पर घडियाली आंसू तो बहाते हैं परन्तु इस त्रासदी को निपटने में असफल हो कर इसको विकराल बनाने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कृत्यों पर अपने निहित स्वार्थो के लिए पर्दा डालते है।
गौरतलब है कि विजय बहुगुणा को हटाये जाने के बाद पदासीन हुए कांग्रेसी मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश पर पूरी केदारघाटी में जिस प्रकार से लापता लोगों की तलाश में सघन अभियान चलाया जा रहा है। डीआईजी संजय गुंजियाल के नेतृत्व में गठित इस उच्च स्तरीय टास्क फोर्स के साथ इस कार्य में भारत तिब्बत बाॅर्डर पुलिस, उप्र पुलिस व एसडीआरएफ के जवान जुटे हुए है। सोनप्रयाग से केदारघाटी तक चलाये जा रहे इस अभियान में केदारनाथ के आसपास के जंगल, जंगल चट्टी में 8 कंकाल व रामवाडा में 9 कंकाल मिले। इनके डीएनए लेने के बाद इनका विधिवत दाह संस्कार भी किया जायेगा।


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