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हिंदी साहित्य का आरंभ आठवीं शताब्दी से माना जाता है। यह वह समय था जब सम्राट् हर्ष की मृत्यु के बाद देश में अनेक छोटे-छोटे शासन केंद्र स्थापित हो गए थे जो परस्पर संघर्षरत रहा करते थे. विदेशी आक्रांताओं से भी इनकी टक्कर होती रहती थी.
संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित, सरल, लचीली व वैज्ञानिक भाषा है..हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त देवनागरी लिपि अत्यन्त वैज्ञानिक है.यह हमारी भावनाओं का सम्प्रेषण करने पूर्ण सक्षम है.हिन्दी को संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन शब्दरचनासामर्थ्य विरासत में मिली है। वह देशी भाषाओं एवं अपनी बोलियों आदि से शब्द लेने में संकोच नहीं करती। अंग्रेजी के मूल शब्द लगभग १०,००० हैं, जबकि हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या ढाई लाख से भी अधिक है. हिन्दी बोलने एवं समझने वाली जनता पचास करोड़ से भी अधिक है.हिन्दी का साहित्य सभी दृष्टियों से समृद्ध है.हिन्दी आम जनता से जुड़ी भाषा है तथा आम जनता हिन्दी से जुड़ी हुई है। हिन्दी कभी राजाश्रय की मुहताज नहीं रही. भारत के स्वतंत्रता-संग्राम की वाहिका और वर्तमान में देशप्रेम का अमूर्त-वाहन हिंदी देश की संपर्क भाषा भी है.
भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी के अनुसार आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी.
साथियों, केवल हिंदी दिवस पर भाषणों व नारों से हिंदी का प्रसार व संवर्धन संभव नहीं !! भाषायी राजनीति के चलते कोई भी राजनितिक दल इस दिशा में यथेष्ट निर्णय लेकर अपने हाथ नहीं जलाना चाहता !! इस दशा में आइये.क्यों न हम स्वयं हिंदी विकास व प्रसार के महायज्ञ में ज्ञानवर्धन से परिपूर्ण सकारात्मक पोस्ट्स व टिप्पणियों द्वारा, जिससे दूसरी भाषायी साथी हिंदी की ओर आकर्षित हों, की आहुति समर्पित करें..शुभ


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