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देहरादून(प्याउ)। शिव की पावन देवभूमि में सावन के महीने में सोमवार के दिन मतदान रखने का चुनाव आयोग की नासमझी का खमियाजा आखिर उत्तराखण्ड के तीन विधानसभा उपचुनाव के प्रत्याशियों को भुगतना पडा। हालांकि जागरूक मतदाताओं ने इसके बाबजूद चुनाव आयोग की लाज रख दी। इस उप चुनाव में मुख्यमंत्री की विधानसभा सीट धारचूला में जहां 52 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं सबसे अधिक मतदान डोईवाला विधानसभा सीट पर 54 प्रतिशत हुआ। सबसे कम मतदान सोमेश्वर विधानसभा सीट पर 40 प्रतिशत मतदान हुआ। सबसे हैरानी की बात है कि पूर्वोत्तर में चर्च व शेष भारत में अन्य स्थानों में भी क्षेत्र विशेष में वहां की सामाजिक, धार्मिक व स्थानीय पर्व के दिनों में चुनाव आयोग मतदान या मतगणना तक का आयोजन नहीं रखता। इसके बाबजूद सावन के महिने में भगवान शिव के पावन धाम उत्तराखण्ड में सोमवार के दिन चुनाव आयोग ने मतदान रखने की भूल की। हालांकि इसके बाबजूद जागरूक मतदाताओं ने लाज रख दी। इस बहुत कम मतदान के पीछे उत्तराखण्ड में मतदान से पूर्व तीन-चार दिन लगातार मूसलाधार वर्षा व खेती का काम के साथ साथ लोगों का राजनेतिक दलों की जनविरोधी प्रवृति भी काफी हद तक जिम्मेदार है। इस कम मतदान से सभी प्रत्याशी सहमें हुए है। हालांकि 25 जुलाई को मतगणना के बाद इस कम मतदान का दंश किसको झेलना पड़ा इसका भी रहस्य खुल जायेगा। लोकसभा चुनाव में हुए भारी मतदान के बाद विधानसभा उपचुनाव में जिसमें स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री भी चुनावीं दंगल में उतरे हों वहां मतदाताओं में उत्साह न दिखना लोकशाही के लिए गंभीर चिंतन का विषय तो है। भले ही राजनीति में धुरंधर इन उपचुनाव में कांग्रेस को लाभांवित मान रहे हैं परन्तु कम मतदान होने व भाजपा के पास समर्पित कैडर होने के कारण कांग्रेसी दिग्गज भी आशंकित है।



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