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रूपकुंड (कंकाल झील) :-===============================
यह हिमालय की गोद में स्थित एक मनोहारी और खूबसूरत पर्यटन स्थल है, यह हिमालय की दो चोटियों के तल के पास स्थित है: त्रिशूल (7120 मीटर) और नंदघुंगटी (6310 मीटर). बेदनी बुग्याल की अल्पाइन तृणभूमि पर प्रत्येक पतझड़ में एक धार्मिक त्योहार आयोजित किया जाता है जिसमें आसपास के गांवों के लोग शामिल होते हैं. नंदा देवी राज जात का उत्सव, रूपकुंड में बड़े पैमाने पर प्रत्येक बारह वर्ष में एक बार मनाया जाता है. कंकाल झील वर्ष के ज्यादातर समय बर्फ से ढकी हुई रहती है. हालांकि, रूपकुंड की यात्रा एक सुखद अनुभव है. पूरे रास्ते भर, व्यक्ति अपने चारों ओर से पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ होता है.

यात्री के लिए रूपकुंड जाने के कई रास्ते हैं. आम तौर पर, ट्रेकर और रोमांच प्रेमी सड़क मार्ग से लोहाजुंग या वान की यात्रा करते हैं. वहां से, वे वान में एक पहाड़ी पर चढ़ते है और रन की धर पहुंचते हैं. वहां कुछ समतल क्षेत्र है जहां ट्रेकर रात को शिविर लगा सकते हैं. अगर आसमान साफ हो, तो व्यक्ति बेदनी बग्याल और त्रिशूल देख सकता हैं. अगला शिविर स्थान है बेदनी बग्याल, जो वान 12-13 किमी दूर है पर है. वहां खच्चरों, घोड़ो और भेड़ो के लिए एक विशाल चरागाह है. वहां दो मंदिर और एक छोटी झील है जो उस जगह की खूबसूरती को बढ़ाता है. रूपकुंड, नंदा देवी पंथ की महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा के मार्ग पर स्थित है जहां नंदा देवी राज जात यात्रा का एक मुख्य पड़ाव भी माना जाता है इसे ऐतिहासिक तौर पर नर कंकाल झील भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर समय समय पर मानव कंकाल के पाए जाने की पुष्टि की गयी है


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