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अकसर हम कई किस्से कहानियां सुनते है, जिन पर यकीन कर पाना बहुत मुश्किल होता है। ऐसी ही एक कहानी पंजाब रेजिमेंट के जवान हरभजन सिंह की है, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनकी आत्मा पिछले 45 सालों से देश की सीमा की रक्षा कर रही है। सैनिकों का कहना है कि हरभजन की आत्मा उन्हें चीन से आने वाले खतरे के बारे में पहले ही बता देती है। इस बात पर यकीन करना चाहे आपके लिए मुश्किल हो, लेकिन खुद चीनी सैनिक भी इसे मानते है। इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की एक खाली कुर्सी लगाईं जाती है ताकि वो मीटिंग अटेंड कर सके।
30 अगस्त 1946 को जन्मे हरभजन सिंह 1968 में एक दुर्घटना के दौरान सिक्किम में मारे गए थे। जब दो दिन तक उनका शव नहीं मिला तो उन्होंने एक साथी सैनिक के सपने में आकर अपने शव की जगह बताई थी, जब जाकर उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इस चमत्कार के बाद साथी सैनिकों ने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया, जो बाबा हरभजन सिंह मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर गंगटोक में जेलेप्ला दर्रे और नाथुला दर्रे के बीच, 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर में हरभजन की फोटो और उनका सामान रखा है।
हरभजन मृत्यु के बाद से लगातार ड्यूटी दे रहे है और इसके लिए उन्हें तनख्वाह और प्रमोशन भी दी जाती है। पहले तो उन्हें 2 महीने की छुट्टी पर गांव भी भेजा जाता था, लेकिन अब बाबा बारह महीने ड्यूटी पर रहते है। मंदिर में बाबा हरभजन का एक कमरा भी है, जिसमें हर रोज सफाई करके बिस्तर लगाया जाता है। कमरे में बाबा की वर्दी और जूते रखे जाते हैं, जिन पर हर रोज कीचड़ पाया जाता है।


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