.

.

uttarakhandnews1.blogspot.in



जागर विधा की विरासत को नया आयाम देती बंड की बेटी पम्मी नवल (पवित्रा टम्टा)---संजय चौहान --उत्तराखंड में लोक गायिकी के क्षेत्र में महिलाओं का अहम योगदान रहा हैं। बोलांदी नंदा यानी बसंती बिस्ट ने इसे एक मुकाम दिया और अब इसी विधा को चमोली के बंड की बेटी पम्मी नवल एक नया आयाम दे रही है जागर शैली की नवोदित गायिका पम्मी नवल (पवित्रा टम्टा) अपने सुरीले कंठ से लोगों का खूब मन मोह रही हैं।चमोली जिले के बंड पट्टी के पीपलकोटी के गडी (अगथला) में 5 जून 1973 को जन्मी पम्मी आज लोगों के लिए प्रेरणास्रेत बनी हुई है। गायन के नैसर्गिक गुण को लिए हुए पम्मी ने प्राइमरी से इंटर तक की शिक्षा गडोरा में प्राप्त करने के पश्चात पीजी कालेज गोपेश्वर से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1990 में पम्मी राजनीति विज्ञान के प्रवक्ता केएल टम्टा के साथ परिणय सूत्र में बंधी। स्कूली जीवन से ही गीत संगीत में रुचि रखने का का सिलसिला आगे भी निरंतर जारी रहा। लोक संगीत में साधनारत पम्मी ने वर्ष 2000 में अपने लोक गीतों को आडियो एलबम के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया। सुरसुरया बथौं, रंग रंगीला छैला, धौनी तिलेधारू बोला, बिंदुली गोरख्यांण, नीलू हे, हंसुली आदि पर आधारित गीतों की प्रस्तुति लोगों को खूब भा रही है। यही नहीं झूमेलो, थडिया, बाजूबंद, पांडवांणी, बगड्वाली और खुदेड गीत भी पम्मी ने खूब गाए। जागरों पर कें द्रित उनकी कैसेट नंदा राजजात के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रदेश की दुर्लभ होती लोक संवेदना को खूाब व्यक्त कर रही है। हुरणी को दिन हुरणी नीभगैं धार डुब्या दिन गाडू छाया ऐगेह् इस कैसेट के माध्यम से पम्मी ने ऐतिहासिक जागरों और पंवाडों और प्रचलित लोक सांस्कृतिक गाथाओं को नई पीढी के सामने रखकर इतिहास के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। वह इस समय नंदा देवी के राजजात गीतों पर शोध भी कर रही हैं। उनकी कई एलबम बाजार में आ चुकी हैं। उत्तराखंड के कई सांस्कृतिक मंचों में अपनी लोक गायिकी का बेहतर प्रदर्शन करने के चलते वह कई बार सम्मानित हो चुकी हैं। नेहरू युवा केंद्र चमोली द्वारा स्वर्गीय चंद्रकुंवर बत्र्वाल की स्मृति में दिये जाने वाले सम्मान से वह पुरस्कृत हो चुकी हैं। बसंती बिष्ट के बाद वह एकमात्र एक ऐसी जागर गायिका है जो गायन संगीत और रचनाकार होने के साथ साथ अन्वेषक भी हैं। जागर शैली की गायिका है पवित्रा झूमेलो, थडिया, बाजूबंद, पांडवांणी, बगड्वाली और खुदेड गीतों में की है महारथ हासिल की है


See More

 
Top