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ये दर्द वही समझ पाता है जिसका जंगल से राेज का नाता है. कल ब्रह्मखाल हरेती निवासी राजमती देवी. सरकारी बाघ ने झपट्टा मार कर माैके पर ही उसकी जीवन लीला समाप्त कर दी. पाैडी चमाेली टिहरी में आये दिन बाघ ग्रामीणाें काे अपना शिकार बना जाता है. इसकी भयावहता का अंदाजा इन तस्वीराें से लगाया जा सकता है. सुना है सरकार आैर वन विभाग यहां बाघाें के लिए आैर भी अभ्यारण्य बनाने जा रहे है.संभव तया अभी बाघ ने सरकारी वाहनाे में सैर करने वाले का बेटा नहीं खाया . किसी बनाधिकारी की बीबी नहीं नाेची हाे..ताे वे आम आदमी का दर्द समझ नहीं पा रहे हैं . जिस परिवार का इकलाैता चिराग बाघ का निवाला बन जाता है उसकी दर्द पीड़ा काे शब्दाें में बयां करना असंभव है. .दर असल याेजना काराें के लिए आदमी की कीमत बाघ की सुरक्छा की बातें करना आसान है. बाघ मारा जाना गैर जमानती अपराध २ लाख रू जुर्माना व सात साल तक सजा का प्रावधान है. पर बाघ द्वारा आदमी मारे जाने पर सिर्फ ५ हजार रू अहेतुक राशि. वाे भी मृतक के परिजनाें काे साबित करना पड़ेगा कि माैत का कारण बाघ का ही हमला है.कितना भद्दा मजाक है ? यहां ताे अब कानून का सिर्फ एक ही मतलब नजर आता है सरकारी पदाें पर कब्जा जमाये महानुभावाें के बाप का राज.


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