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लिम्का बुक में नाम दर्ज कराने वाले नगर पंचायत कपकोट के हरिमोहन ऐठानी का नाम अब वर्ल्ड रिकार्ड इंडिया बुक में भी दर्ज हो गया है। उन्होंने 1260 घंटे में 25 हजार जादुई पहेलियां लिखी हैं। अब उन्होंने गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए मशक्कत तेज कर दी है।

नगर पंचायत कपकोट के ऐठाण वार्ड निवासी 40 वर्षीय हरिमोहन ऐठानी इंटर कालेज असों में पीटीए शिक्षक हैं। जीवन में कुछ अलग करने की चाह ने उन्हें पहचान दिलाई है। बताते हैं अमर उजाला में प्रकाशित होने वाली जादुई पहेलियां देख उन्होंने वर्ष-2009 में पहेलियां बनाने की शुरुआत की। शुरू में उन्हें कुछ परेशानी हुई, लेकिन लगातार अभ्यास से उन्हें कामयाबी मिल गई। 25 हजार पहेलियां बनाने में उन्हें 1260 घंटे लगे।
अलग-अगल अंकों में बनी वर्ग पहेली की खासियत यह है कि उसे जिस हिस्से भी जोड़ा जाए उनका जोड़ बराबर आता है। अंदर के खानों में पहेलियों को उप वर्ग कहा जाता है। उन्हें गिनने पर पहेलियों का जोड़ भी बराबर आता है। उन्होंने 450 चार्ट पेपरों में हाथ से 48 हजार मैजिक स्क्वायर बनाए हैं। इनका वजन 13 किलोग्राम है।16 सितंबर 2014 को डाक से लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज होने का प्रमाण पत्र मिला। अब 25 मार्च को उन्हें वर्ल्ड रिकार्ड इंडिया के संस्थापक पवन सोलंकी के हस्ताक्षरों से वर्ल्ड रिकार्ड का सर्टिफिकेट, ट्राफी, मेडल मिला है।

वर्ल्ड रिकार्ड इंडिया में नाम आने पर हरिमोहन ऐठानी ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया है। उनका कहना है कि जादुई पहेली बनाने में अमर उजाला मार्गदर्शक बना। उनकी पहेलियों की खबर को अमर उजाला ने पहली बार 23 अप्रैल-09 को छापा था। लिम्का बुक में नाम आने की खबर भी 13 अक्तूबर 2014 को विशेष तरीके से छापी थी।


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