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हल्दुचोड़ के प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील चेक कर रहा था तो मेरी नजर इन दो अलग बैठे बच्चों पर पड़ी
ये दोनों सगी बहनें हैं छोटी वाली विकलांग है बोल भी नहीं सकती है | इनकी माँ मर गयी है और बाप शराबी डम्पर चालक है उसको बच्चों की खाने पीने की कपड़े लत्ते की कोई परवाह नहीं होती है
ये बच्चे यहाँ की शिक्षिकाओं की मेहरबानी से पल रहे हैं वही इनके लिए कुछ पुराने कपडे ला देती हैं और मिड डे मील का बचा भोजन इनको रात को खाने के लिए दे देती हैं रात को बच्चे सुबह के बचे मोटे ठन्डे चावल से ही पेट भरते हैं |
इस छोटी विकलांग बच्ची की बड़ी बहिन एक माँ का किरदार निभाती है वो अपने हाथों से इसे खाना खिला रही है और खुद भी खा रही है बड़ा ही दिल को दर्द करने वाला नजारा था 


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