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उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलन में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दिल्ली के उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन के अग्रणी संगठनों (उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा, उत्तराखण्ड जनमोर्चा, उत्तराखण्ड लोकमंच, उत्तराखण्ड महासभा व उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति ) ने 8 अप्रैल को दिल्ली के उत्तराखण्ड निवास में उत्तराखण्ड सरकार के राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप से दो टूक शब्दों में कहा कि बैठकों का अंतहीन दौर जारी रखने के बजाय शीघ्र ही दिल्ली में मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ आंदोलनकारियों की एक निर्णायक बैठक कर आंदोलनकारियों के चयन आदि समास्याओं का समाधान करें।
आंदोलनकारी संगठनों के प्रमुखों के सुझावों से सहमति प्रकट करते हुए धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि वे शीघ्र ही प्रमुख आंदोलनकारी संगठनों के साथ मुख्यमंत्री की एक विशेष बैठक का आयोजन करायेंगे।
बैठक में आंदोलनकारियों ने सुझाव दिया कि सरकार ने राज्य गठन आंदोलनकारियों के चिन्हिकरण करने के लिए जो मानक रखे वह राज्य गठन आंदोलनकारियों का अपमान करने वाले व तर्कसंगत नहीं है। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार को चाहिए कि जेल जाने, अखबार में प्रकाशित होने या अस्पताल आदि के प्रमाणपत्र के बजाय समर्पित आंदोलनकारी संगठनों को मानक मानना चाहिए। इससे गलत लोग किसी भी सूरत में आंदोलनकारी नहीं बन पायेंगे। दिल्ली में राज्य गठन आंदोलनकारियों का चयन दिल्ली में ही किया जाना चाहिए। इसके साथ 6 से 3 साल तक निरंतर धरना देने वाले समर्पित आंदोलनकारियों के लिए सर्वोच्च वरियता देने की भी मांग की गयी। आंदोलनकारियों ने इस मामले को वर्षो तक लटकाने के बजाय युद्धस्तर पर समाधान करने की भी मांग की। इसके साथ भविष्य में होने वाली बैंठक में उक्रांद, भाजपा व वामपंथी आदि दलों से जुडें आंदोलनकारियों को भी आमंत्रित किया जायेगा। इसके साथ सूरत सिंह राणा जैसे अस्वस्थ आंदोलनकारियों को सरकार बिना भेदभाव के सहयोग दे।
इस बैठक में उत्तराखण्ड सरकार के राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप के अलावा उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत, उत्तराखण्ड लोकमंच के अध्यक्ष बृजमोहन उप्रेती, उत्तराखण्ड जनमोर्चा के पूर्व अध्यक्ष रवीन्द्र बिष्ट, सुरेशानंद बसलियाल, बृजमोहन सेमवाल,व चंद्रशेखर जोशी , उत्तराखण्ड महासभा के अनिल पंत व जगदीश प्रसाद कुकरेती व उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति के के. पंत, एस के जैन, मनमोहन, पुष्पा घुघत्याल, सुभाष चैहान, भुवनेश डयूंडी व देवेन्द्र पंत आदि सम्मलित हुए।


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