.

.

uttarakhandnews1.com


गढ़ राजकाज के समय श्रीनगारिया गढ़वाली राजभाषा के रूप में गढ़वाल में लोकप्रचलित थी आज यह बोली के रूप में भी सबसे मधुर व लोकप्रचलित मानी जाती है. यही नहीं गढ़वाली बोली के अन्य रूपों में जौनपुरिया, जौनसारी, रवांळटी, जधी, मार्छा, सलाणी, बघाणी, बारह्स्युं, राठी इत्यादि कई बोलियाँ बोली जाति हैं जो अपने अपने क्षेत्र की गढ़वाली बोली है. एक मात्र जौनसारी समाज ही ऐसा है जो उसे अपनी अलग बोली मानता है.
मित्रों आपसे अनुरोध है कि अपने क्षेत्र में बोली जाने वाली कौन सी गढ़वाली बोली है उसके बारे में हम सभी का ज्ञानार्जन करने की कृपा करें ताकि हम समस्त गढ़वाल को करीब से जान सकें. यही बात कुमाऊ के मित्रों पर भी लागू हो ताकि हम कुमाउनी को जान सकें.



See More

 
Top