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डेढ दर्जन आदमखोर गुलदार को मौत की नींद सुलाने वाले जॉय हुकिल फिर निकले आदमखोर की खोज में. ...!
विगत दिन पूर्व टिहरी गढ़वाल की भरपूर पट्टी के भटकोट गॉव में 60 बर्षीय महिला भुवना देवी को अपना निवाला बनाने वाले गुलदार की तलाश में निकले बन विभाग के अधिकृत शार्प शूटर जॉय हुकिल कल से इस क्षेत्र में गुलदार की रेकी करते हुए नजर आये. ज्ञात हो कि अभी तक लगभग 15 गुलदारों को मौत के घाट उतारने वाले जॉय हुकिल एक बार गुलदार के बेहद करीबी आक्रमण से बच चुके हैं. गढ़वाल कुमाऊ में दहशत मचाने वाले गुलदारों के बारे में उनका कहना है कि कि वन्य जंतुओं में अगर सबसे ज्यादा परेशान कोई प्राणी है तो वह गुलदार बाघ व शेर प्रजाति के हैं क्योंकि इसके अलावा जितने भी वाइल्ड एनिमल होते हैं वे घास फूस खाकर भी अपना भरण पोषण कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम बाघ बचाने के लिए मुहीम चला रहे हैं अच्छी बात है. आये दिन कई एनजीओ इस बाबत हो हल्ला भी काटते हैं लेकिन कई को यह तक पता नहीं है कि कौन गुलदार है और कौन बाघ..! लेपर्ड और बाघ में हमें अंतर मालुम नहीं है. लेपर्ड को सबसे चालाक शिकारी कहने वाले जॉय हुकिल का कहना है कि यह इतना शातिर और चालाक होता है कि आम आदमी और शिकारी में इसे अंतर महसूस करने में ज्यादा समय नहीं लगता. 
ज्ञात हो कि जॉय हुकिल इससे पूर्व भी इस क्षेत्र में 2009 में एक आदमखोर को मौत की नींद सुला चुके हैं.
जॉय हुकिल इतने सरल और मृदु स्वभाव के हैं कि उन्हें देखकर कोई यह नहीं कह सकेगा कि ये इतना खतरनाक शार्प शूटर है. जॉय शक्ल से किसी मल्टीनेशनल कम्पनी के इंजिनीयर लगते हैं.लेकिन आदमखोर गुलदार की गतिविधियों पंजे के निशाँ से वे भांप लेते हैं कि शिकारी गुलदार नर है या मादा 
. सबसे बड़ा आश्चर्य तो मुझे यह सुनकर हुआ कि बन विभाग के पास ऐसा कोई बजट ही नहीं होता जो इन आदमखोर गुलदारों को मारने के लिए इन शार्पशूटरों को दिया जाता है. हद है हजारों लोगों की जान की रक्षा करने वाले ये मानव रक्षक जीरो हावर कालिंग पर पहुँच जाते हैं और अपना पेट्रोल खाणा पीना सब साथ लेकर ..लेकिन बन विभाग के पास इस्नके लिए कोई बजट नही. जॉय हुकिल ने बताया कि अब तक वह पौड़ी गढ़वाल में पांच बाघ मार चुके हैं लेकिन उन्हें पांचवें बाघ मारने पर एक रेंज अधिकारी ने जरूर पांच हजार पुरस्कार स्वरुप दिए हैं


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