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Pauri, July 19, 2015

रोज मर्रा की जिंदगी में बौन्साल से कंडारपानी भेटी मुंडनेश्वर कल्जीखाल अदवाणी टेक्का पौड़ी या फिर बौन्साल से नगर, मिर्चोड़ा, थैर, हाच्युं, चिलोली किमोली से कल्जीखाल, टंगरोली, कडैखाल, होकर परसुन्डाखाल या टेका निकली इस रोड पर रोज सैकड़ों गाड़ियां चलती हैं. लेकिन बौन्साल के पास असवालस्यूं में प्रवेश कर रहेनयार नदी पर बने टिन निर्मित पुल की झीर्ण-शीर्ण अवस्था पर शायद ही किसी क्षेत्रीय नेता जनप्रतिनिधि का ध्यान गया हो. गीता अपने गॉव मलाऊँ अस्वाल्स्युं से जब वापस लौट रही थी तब उसे इसी पुल से गुजरना पड़ा. मुलत: दुबई में ऐशी-आराम का जीवन निर्वाह कर रही गीता चंदोला कई बर्षों से समाज सेवा में लगी हुई हैं चाहे वह गल्फ कंट्री हो या अपना देश. उनका सेवाभाव हर जगह आदर योग्य रहा. कई पुरुष्कारों से नवाजी गयी गीता चंदोला ने जब स्थानीय लोगों को चेताया कि यह पुल कभी भी किसी दुर्घटना का सबब बन सकता है तो कईयों ने हंसी में बात उड़ा दी तो कई बोले मैडम कहाँ कौन ध्यान देता है ऐसी छोटी बातों पर.
गीता देहरादून पहुंची और टिहरी से पत्रकार प्रदीप थलवाल व रुद्रप्रयाग के मदन सिंह को लेकर आज रात्री 9:00 बजे मुक्यमंत्री से मिली और पुल सम्बंधित जानकारी से पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री हरीश रावत के समक्ष रखी जिस पर मुख्यमंत्री ने फ़ौरन टिप्पणी भी लिख डाली. पुल पर कार्य हो न हो यह अलग बिषय है लेकिन गीता चंदोला ने न सिर्फ अपनी जन्मभूमि की पीड़ा को हाई कमान तक पहुंचाया बल्कि एक ऐसी पहल की जो सबक देने वाली है उन क्षत्रपो को जो खामख्वाह पानी सकी बघारते रहते हैं. गीता मुख्यमंत्री के व्यवहार से गदगद होकर बताती है कि सचमुच अगर ऐसे मुख्यमंत्री को कार्य करने में अडचने न आयें तो प्रदेश हित में कई कार्य होने संभव हैं.
Courtesy: Manoj Istwal


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