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संस्कृतियों के संवर्धन के प्रयास क्रम में "उत्सव ग्रुप" की तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला की इन उपलब्धियों को उत्सव परिवार अपना गौरव मानता है। प्रख्यात लोक विशेषज्ञ डॉ. माधुरी बर्थवाल, गढ़गीतों की शुरुवाती स्वर कोकिला रेखा धस्माना उनियाल और साथ में आयीं कांता घिल्डियाल ने प्रतिभागियों को लोकाचार से जुडी परम्पराओं,विधाओं,शैलियों,गीतों,नृत्यों का ऐसा लोक बोध कराया जो चिर स्मृतियों में बना रहेगा। ऐसी भी आशा है कि गृहणियों द्वारा अर्जित लोक ज्ञान नईं संतति तक भी जा सकेगा।


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