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करगिल युद्ध, में उतराखंड के करीब 115 जाँबाज शहीद हुए । इस तरह देश के ऑपरेशन विजय युद्ध में उतराखंड प्रदेश की भूमिका अहम रही ।मैं युद्ध के दौरान नव भारत टाइम्स मे था ।साथ ही पीजी पत्रकारिता में अध्यनरत था। टिहरी के 12 जवान शहीद हुए थे ।उन पर शोध कार्य
किया ।शहीद जवान के परिजन किस तरह जीवन चला रहे हैं? क्या आर्थिक स्थिति है? कितने बच्चे हैं?

अब कौन सहारा होंगे इत्यादी । पूरा विवरण है। 37 लाख तक परिजनों को मिले ।लेकिन इस पैसे ने कईयों के घर बर्बाद कर दिए ।

कुछ विधवा लालच में अपने मायके आ गई ।शहीद के बूढ़े मां- बाप को अपने बेटे की याद के शिवा कुछ नहीं मिला ।पथराईं हुईं आंखे अपने बेटे को ढूंढ रही है आज तक? उनहे धेला नहीं मिला।मैं समझता हूँ कि इस कानून में संशोधन करने की आवश्यकताहै । जिसका बेटा वह कुछ नही और जो दो- चार साल पहले आई वह सबकुछ हकदार । और फिर हो डटी रहने वाली, तो ठीक,बोरिया बिस्तर बांध कर यूँ ही चला जाना, कितना उचित है ?वाजिब है? आप ही बताइए? प्लीज ।

ज्यादतर करगिल शहीद की विधवाएं ,गांव त्याग कर शहर,नगर, कसबे में बसने आ गई हैं । सास- ससुर से दूर अपने पिता के साथ पैट्रोल पंप या गैस एजेंसी,दुकान, बिजेनस चला रही हैं ।मैं यह नहीं कह रहा कि हर विधवा खराब है ।लेकिन जब पति जीवित जवान था। तब तब तक सास -ससुर देवर -ननद ठीक थे।

जैसे शहीद होने के बाद दस- दस लाख की किस्त आई, देश /प्रदेश से।वैसे ही डैडी और भुला याद आ गए ।मैंने शोध 1999 में किया, तब सचमुच की पीड़ा थी ।पूरा शोध महिला कैसे जीएगी पर भावनात्मक ढंग से खड़ा किया गया था। टिहरी की सीमाएं यदि तीन- चार दिन लगातार चलें ।तब पूरी होंगीकहां हिंडोलाखाल? और कहां धौंतरी के बगल में प्रतापनगर?

आप समझ सकते हैं ।लेकिन 16-17साल तक गंगा में बहुत पानी बह गया । आप कह रहे होंगे कि, 115 शहीद के बारे में क्यों नहीं शोध कार्य किया? यह मेरे लिए संभव नहीं था ।क्यों संभव नहीं हुआ ।जब आप मिलेंगे तब पूरा वाक्य बताऊंगा । शहीदों को नमन।जय उतराखंड ।
Sheeshpal Gusain 


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