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हरिद्वार:  23 जुलाई, 2015

उत्तराखंड में खेती को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली सुअरों पर राज्य सरकार आंख टेढ़ी करने की फिराक में है। प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तराखंड अनिल कुमार दत्त ने बताया कि जंगली सुअर को 'नाशक जीव' की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव तैयार करके केंद्र के वन मंत्रालय को जल्द ही भेजा जायेगा।

अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो जंगली सुअर को वन विभाग की अनुमति के बिना मारने का अधिकार मिल जायेगा। इससे पहले वन्य जीव संरक्षण (केंद्रीय) अधिनियम 1972 की धारा 11 की शक्तियों का प्रयोग कर 2005-2006 में जंगली सुअर को पीडक जीव :हानि पहुंचाने वाला: घोषित करके इसे प्रार्थना पर नष्ट करने की अनुमति देने का अधिकार वन प्रभाग स्तर पर दे दिया गया था।

गंगा घाटी के भागीरथी वन वृत्त के वन संरक्षक एसपी सुबुद्घि ने बताया कि उनके अधिकार क्षेत्र के केवल दो वन प्रभागों, उत्तरकाशी एवं टिहरी गढवाल वन प्रभागों में 2006 से लेकर अब तक कुल 41 जंगली सुअरों को नष्ट करने की सशर्त अनुमति दी गयी। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी में केवल एक नर जंगली सुअर की मारा जा सका।

जंगली सुअर को मारने के लिये सही बंदूक की जरुरत होती है जो अमूमन किसानों के पास नहीं होती। दत्त ने कहा कि जंगली सुअर अपनी सहज वृत्ति से उल्टा उसी और प्रहार के लिए दौडता है, जिधर से बन्दूक से गोली चलने की आवाज आती है और यह स्थिति बहुत घातक होती है।
Courtesy: नवभारत टाइम्स




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