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देहरादून: 28 जुलाई, 2015

स्टिंग मामले में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की जिद का सलीके से जवाब दिया। हरीश जिद पकड़े थे कि फारेंसिक जांच से पहले अफसर पर कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन केंद्र ने शाहिद की प्रतिनियुक्ति रद्द कर उन्हें वापस बुला लिया।

केंद्र ने संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार ही कदम उठाए। पहले गुजरात सरकार ने शाहिद की उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति के लिए दी गई एनओसी वापस लेने का पत्र दिल्ली भेजा और फिर केंद्र ने एक ही चाल में हरीश को मात दे दी। भारतीय प्रशासनिक सेवा देश के संविधान से गवर्न होती है। हर आईएएस पर उसके मूल कैडर का ही नियंत्रण होता है।

इसलिए मोहम्मद शाहिद पर गुजरात सरकार का ही एकाधिकार है। 22 जुलाई को जब शाहिद के कथित स्टिंग की खबर प्रसारित हुई तो उस दिन हरीश रावत पशोपेश में थे। कार्रवाई करते तो आरोप की पुष्टि हो जाती। इसीलिए केंद्र को पटखनी देने के लिए शाहिद के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई को खारिज कर दिया।

इसके बाद सरकार व कांग्रेस दोनों ने मान लिया कि अब कुछ नहीं बिगड़ेगा। लेकिन यहीं से हाथ आई बाजी फिलसने लगी। यदि कार्रवाई की होती तो शाहिद की प्रतिनियुक्ति भी रद्द न होती। इसी बीच केंद्र व गुजरात के बीच का संवाद का स्तर बढ़ गया।

24 जुलाई को गुजरात सरकार ने एक पत्र केंद्र को भेजा और कहा कि उनके कैडर के 1998 बैच के आईएएस मोहम्मद शाहिद उत्तराखंड में प्रतिनियुक्ति पर है, इसके लिए केंद्र को गुजरात द्वारा दी गई एनओसी वापस ली जाती है।

25 जुलाई को केंद्र सरकार ने पीएमओ व डीओपीटी को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति की बैठक बुलाकर शाहिद का उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति का आदेश निरस्त कर दिया।

हालांकि शनिवार को केंद्रीय कार्यालयों में अवकाश होता है, लेकिन इसी दिन बैठक हुई और इसी दिन शाम को डीओपीटी ने उत्तराखंड सरकार को आदेश भेज दिया। अब शाहिद डीओपीटी में जाकर ज्वाइनिंग देंगे और उसके बाद केंद्र सरकार ही तय करेगी कि उन्हें क्या करना है।

चिंतित हो उठी राज्य सरकार
शाहिद को दिल्ली वापस बुलाने से हरीश सरकार में चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही है। क्योंकि अभी तक तो केंद्र सरकार शाहिद के खिलाफ कुछ नहीं कर सकती थी, लेकिन अब शाहिद के बहाने हरीश पर कई निशाने साधे जा सकते हैं।

यदि केंद्र की मंशा केवल शाहिद को उत्तराखंड से हटाने की होती तो उन्हें गुजरात भेजा जाता, मगर ऐसा नहीं हुआ। उन्हें केंद्र में ज्वाइन करने को कहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि केंद्र चाहेगा तो इसी प्रकरण के बहाने अब शाहिद को माध्यम बनाकर हरीश पर शिकंजा कसा जा सकता है।
Courtesy: अमर उजाला




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