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देहरादून: 30 जुलाई, 2015

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की उत्तराखंड आयुष प्री मेडिकल प्रवेश परीक्षा (यूएपीएमटी) पास करने वाले युवाओं के लिए बुरी खबर है।

उन्होंने जिन सरकारी बीएएमएस की सीटों पर दाखिले के लिए परीक्षा पास की है, इस साल वो सीटें प्रदेश को मिलनी ही मुश्किल हो गई हैं। केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआई) ने 30 जुलाई तक का समय निरीक्षण के लिए दिया था लेकिन समय पर निरीक्षण नहीं हो पाया है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के हर्रावाला स्थित परिसर में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) की 60 सीटें, ऋषिकुल आयुर्वेदिक एवं गुरुकुल आयुर्वेदिक विवि परिसरों में बीएएमएस की 100-100 सरकारी सीटों पर दाखिला होना था।

आयुर्वेद विवि ने इसकी प्रवेश परीक्षा कराकर परिणाम भी एक जून को जारी कर दिया था। इन परिसरों में सीसीआई की ओर से मान्यता के लिए 30 जुलाई से पहले निरीक्षण कराया जाना था, जिसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की जांच की जाती।

विवि ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई, लेकिन विवादों के चलते वह अटक गई। इस कारण निरीक्षण की अंतिम तिथि तक भर्ती ही नहीं हो पाई। ऐसे में निरीक्षण नहीं हो पाएगा। इस संबंध में अब तक सीसीआई से न तो कोई मोहलत मांगी गई है और न ही सीसीआई ने मोहलत दी है।

माना जा रहा है कि अगर समय रहते सीसीआई से इस विवाद को लेकर समय न मांगा गया और उन्होंने छूट न दी तो इस साल बीएएमएस की एक भी सरकारी सीट प्रदेश के होनहारों को नहीं मिल पाएगी।

विवि को केवल प्राइवेट कॉलेजों की सीटों के लिए ही दाखिले करने पड़ेंगे। विवि ने इस निरीक्षण के लिए 40 लाख रुपए सीसीआई में जमा किए हुए हैं, जो कि निरीक्षण न होने की सूरत में वापस नहीं मिलेंगे।

इससे इतनी बड़ी रकम का भी नुकसान होने जा रहा है। विवि के पदाधिकारी फिलहाल विवाद के चलते इस मामले पर कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। ऐसे में सवाल ये है कि जिन हजारों युवाओं ने इतनी मेहनत से प्रवेश परीक्षा पास की, उनके भविष्य के साथ इस खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन होगा?
Courtesy: अमर उजाला


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