.

.

uttarakhandnews1.com



देहरादून : 29 जुलाई, 2015

पिछल दिनों ऋषिकेश में हुए एक स्कूल संचालक बेटे हार्दिक के अपहरण में उसी के दोस्त सत्यम का हाथ था।

जुर्म की राह में पहला कदम सत्यम बंसल को रास नहीं आया। आरोपियों की मानें तो सत्यम ने अपहरण की पूरी पटकथा लिखी थी। मसलन, अपहरण कैसे करना है और फिरौती किस तरह से वसूलनी है। अपहरणकर्ता भाइयों ने उसी योजना पर काम तो किया, लेकिन उसकी सांसों को अपने लिए खतरा मानकर छीन लिया।

कम उम्र में नशे की लत का शिकार हुए सत्यम बंसल जुर्म के तरीके से वाकिफ था। अपहरण की योजना तो रोहित, मोहित और सत्यम ने बनाई थी, लेकिन उसे कैसे अंजाम देना है, यह सब सत्यम के दिमाग से निकला था।

पुलिस पूछताछ में रोहित और मोहित यह तो नहीं बता पाए कि सत्यम ने अपहरण का यह आइडिया कहां से लिया था, लेकिन हार्दिक को बुलाने के साथ ट्रेन से फिरौती वसूले जाने की कहानी बनाई थी। अगवा को रखने और रकम वसूलने के लिए स्थान चिह्नित करने की जिम्मेदारी उनकी थी।

पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह ने बताया कि सत्यम और मनोज हार्दिक को भूपतवाला के खड़खड़ी के पास एक आश्रम तक लेकर आए थे, जहां से वह सत्यम को बेहोश कर शामली ले गए थे।

बता दें कि हार्दिक के अपहरण की पूरी कहानी बसंत बिहार के हर्षित तायल अपहरण कांड से मेल खाती है। माना जा रहा है कि इसी अपहरण की तर्ज पर हार्दिक के अपहरण और फिरौती वसूलने का तानाबाना बुना गया।
Courtesy: अमर उजाला



See More

 
Top