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Dehradun , July 21


उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बनने के लिए 13 साल लम्बा संघर्ष करने वाले वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत के लिए अब दिल्ली बेगाना सी हो गयी है। नहीं तो कुछ सालों में जनता को अपने साथ जोडे रखने के लिए वे दिल्ली में साल में कई कार्यक्रम करके उत्तराखण्ड के तमाम नेताओं से हट कर जननेता नजर आते थे। आधा दर्जन बार चुनावी समर में मात खाने के बाद हरीश रावत ने जनता से जुडे रहने के दम पर ही प्रदेश व देश की राजनीति में अपना स्थान बनाने में सफल रहे। वहीं राजनीति में अधिकांश ऐसे नेता रहे जो जीतने के बाद सत्ता की हनक में चूर हो कर जनता को जोड़ना तो रहा दूर अपने समर्थकों को दूर कर जननेता हो कर भी बेगाने से दिखते है। भले ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार दिल्ली में राजनीति के गलियारों में बिहारी आम को भैंट करके बाजी मारी हो पर अपने समर्थकों के साथ आम पार्टी का आयोजन करने में हरीश रावत कई सालों से बाजी मारते नजर आते है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद हरीश रावत भले ही दिल्ली में पहले की तरह उतने कार्यक्रम नहीं कर पा रहे हों। विगत कुछ सालों से हरीश रावत के दिल्ली आवास पर होने वाली विशेष रूप से चर्चित रही आम पार्टी का आयोजन इस साल 21 जुलाई को देहरादून में किये जाने से साफ हो गया कि वे देहरादून में भी जनता से जुडे रहने के दाव पहले की तरह चलते रहेंगे। भले ही मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके दिल्ली आवास पर होने वाली आम पार्टी अब नहीं आयोजित हुई। देहरादून में मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेन्द्र कुमार के अनुसार 21 जुलाई, 2015 को सांय 5 बजे मुख्यमंत्री आवास न्यू कैंट में आम दावत ( मैंगो पार्टी ) का आयोजन किया गया है।


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