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Dehradun: 17 July, 2015

वर्ष 2013 में भीषण प्राकृतिक आपदा के प्रबंधन के दौरान कथित रूप से पिकनिक मनाये जाने के आरोपों के कारण विपक्ष के निशाने पर रही उत्तराखंड सरकार ने अपने अफसरों को क्लीनचिट देते हुए कहा कि कहीं कोई गडबड़ी नहीं हुई और तात्कालिक जरूरत के मद्देनजर फैसले किये गये।

मुख्यमंत्री हरीश रावत को रिपोर्ट सौंपने के बाद राज्य के मुख्य सचिव एन रविशंकर ने संवाददाताओं से कहा कि दो साल पहले केदारनाथ तथा अन्य स्थानों पर आयी आपदा से संबंधित पांच जिलों रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ के जिलाधिकारियों से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करने के बाद जांच रिपोर्ट तैयार की गयी है।

रिपोर्ट में मुख्य सचिव रविशंकर ने स्वीकार किया कि आपदा राहत के दौरान बचाव और राहत में लगे कई लोगों ने मांसाहार का सेवन किया लेकिन कहा कि यूनिफार्म सर्विसेज में इसके सेवन की परंपरा है और कठिन तथा विषम परिस्थितियों में मांसाहार के सेवन को पिकनिक के रूप में परिभाषित नहीं किया जाना चाहिये।

मुख्य सचिव ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में सेवा देने वाले सेना, वायुसेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस तथा राज्य के कई अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा मांसाहारी पदार्थ का सेवन किया।

उन्होंने कहा, आप सभी अवगत हैं कि यूनिफार्म सर्विसेस में मांसाहारी पदार्थ का सेवन करने की एक परंपरा है और इन विषम एवं कठिन परिस्थितियों में कार्य करते समय उक्त प्रकार के पदार्थ का सेवन करने को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिये एवं इसे पिकनिक मनाने के रूप में परिभाषित करना उचित नहीं है।

सामान की खरीद में अधिक बिल देने के आरोप के बारे में रविशंकर ने कहा कि बागेश्वर में आधा किलो दूध की कीमत 194 रूपये अंकित की गयी है लेकिन यह दूध तरल न होकर पाउडर था और आपदा कार्यों के दौरान चाय का प्रबंध करने के लिये इसका उपयोग किया गया।
Courtesy: नवभारत टाइम्स


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