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नैनीताल:17 July, 2015

नैनीताल की मालरोड को मलबा रोड में तब्दील होने के बाद नैनीताल शहर में अंग्रेजों के शासनकाल का ड्रेनेज सिस्टम एक बार फिर चर्चा में छा गया। लोग कह रहे हैं कि यदि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिछले दिनों इंडिया और एवरेस्ट होटल के बीच के नाले को न खुलवाया होता, तो ये दोनों होटल नेस्तनाबूद हो गए होते। ये नाला अंग्रेजों ने बनवाया था।

इन होटलों में देश-विदेश के पर्यटक ठहरे हुए थे। नैनीताल की विधायक सरिता आर्य ने हाई कोर्ट को इस काम के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट की दूरदर्शिता की वजह से नुकसान कम हुआ है। नैनीताल में 24 घंटे के भीतर 400 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जिससे भारी तबाही हो सकती थी।

अंग्रेजों ने बनवाए थे 79 किमी लंबे नाले अंग्रेजों ने नैनीताल शहर की सुरक्षा के लिए 79 किलोमीटर लम्बे नालों का निर्माण कराया था। इनके रखरखाव के लिए हिल साइट सेफ्टी कमिटी गठित भी की गई थी। अंग्रेजों ने ही सेफ्टी के लिहाज से शहर को तीन क्षेत्रों में बांटा था, लेकिन देश की आजादी के बाद इसे भुला दिया गया।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल की बढ़ती दुर्दशा को देख शहर के इतिहासकार एवं पर्यावरणविद डॉ. अजय रावत ने साल 2012 में नालों के अतिक्रमण एवं तमाम समस्याओं पर ध्यान दिलाने के लिए हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने नालों को फिर से जीवित करवाया। इसका ही नतीजा रहा कि 5 जुलाई की बारिश का असर शहर ज्यादा नहीं पड़ा।

देहरादून में बारिश थमने से मिली राहत उत्तराखंड में मंगलवार को कुछ इलाकों में बारिश थमी रही और कहीं-कहीं छिटपुट बूंदें गिरीं। इससे लोगों को राहत मिली। उल्लेखनीय है कि राज्य की 800 सड़कें पिछली बारिश से मलबा आने और चट्टान खिसकने से बाधित हो गई हैं। राज्य के लोकनिर्माण विभाग के मुख्य अभियंता के मुताबिक, इन सड़कों को खोलने के लिए विभाग ने 450 मशीनें विभिन्न क्षेत्रों में झोंकी है। तमाम सड़कों के बंद होने से राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्र मुख्य मार्गों के सम्पर्क से कटे हुए हैं।
Courtesy: नवभारत टाइम्स


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