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उत्तराखंड स्थित मुख्यमंत्री आवास निर्माण के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी से उक्त भवन निर्माण पर पहाड़ी लोक शिल्प का इस्तेमाल करने की वकालत करने वाले मसूरी के पूर्व विधायक व संस्कृति संवर्धन एवं मेला वर्गीकरण के अध्यक्ष जोत सिंह गुनसोला ने इच्छा जताई है कि क्यों न प्रदेश में हर सरकारी इमारत का निर्माण पहाड़ी शैली पर आधारित हो जिनमें खूबसूरत काष्टकला का इस्तेमाल हो और इमारतों की निर्माण शैली रवाई जौनपुर जौनसार के भवनों जैसी हो जो भूकम्परोधी हों लेकिन इन इमारतों में काष्ट कला का बेजोड़ इस्तेमाल हो. जैसे पूर्व में गढ़वाल कुमाऊ में नौखम्बा, तेरह खम्बा, चौखम्बा तिबारियाँ हुआ करती थी या इसी शैली में राज महल निर्मित होते थे.
उन्होंने झुमैलो कार्यक्रम के रोज मुख्यमंत्री हरीश रावत की उस पीड़ा को दोहराते हुए कहा कि परदेश के मुखिया ने टाउन हाल में जिस तरह टिहरी के प्रति अपने शब्द दोहराते हुए वहां के जनमानस के जमीदोज हो चुके मकानों की तिबारियों और शिल्प का उल्लेख करते हुए बताया था कि अब वह लोक काष्ठकला दिल्ली के फाइव स्टार होटल में दिखने को मिलती है, तब मेरा दिल भी बड़ा पसीजा और मुझे लगा कि सचमुच हम वह काष्ठ कला खो देंगे जो हमारे गिने चुने पहाड़ी शिल्पियों के पास बची है इसलिए मेरा कहना है कि क्यों न हम सरकारी भवनों की अब बनने वाली इमारतों का निर्माण ठेठ हिमालयी क्षेत्र के लोकशिल्प पर आधारित करें ताकि उन खाली हाथों को भी काम मिले. परदेश की पैंसा परदेश के वासियों के काम आये जिससे रोजगार भी बढेगा और पलायन भी थमेगा.साथ ही हमारे लोक शिल्प पर आधारित काष्ठकला को देखने देश दुनिया के लोग यहाँ आये जो आगामी भविष्य में हमारी आय का साधन भी बने.पर्वतीय भवन शैली आज भी भूकम्परोधी है इसकीमिशाल हमे गाँवों में खाली भवनों में देखने को मिल जाती है । यह हमारी लोक शिल्प का एक बहुउद्देशीय आर्थिक आधार का सशक्त माध्यम बन जायेंगा ।Manoj Istwal


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