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#uttarakhand-culture
इनसे सीखनी होगी लोकभाषा लोक संस्कृति की परिभाषा |
ये सज्जन कुम्मी घिल्डियाल हैं हम में से अधिकाँश इन्हें जानते हैं. संस्कृति की बात आये तो यह अपना कलेजा चीर कर रख देने वाला ठहरे..! यहाँ तो लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जी के जन्मदिन की बात थी जिन्हें यह लोक संस्कृति के देवता मानते हैं.
पहले देहरादून में आयोजित होने वाले नेगीजी के जन्मदिन के कार्यक्रम में शिरकत करने वाले थे अंतिम समय पर इन्होने अपना कार्यक्रम बदला और जन्मदिन टिहरी में ही मनाने की ठान ली. अब इस अन्दाज से आप ही लगा सकते हैं कि लोकगायक नेगीजी को लोग किस तरह पूजा करते हैं.
Manoj Istwal




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