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देहरादून : 4 अगस्त, 2015

देहरादून नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड के शिवपुरी से ऋषिकेश तक गंगा तटों पर राफ्टिंग शिविरों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में जवाब नहीं दिए जाने की पर्यावरण, वन मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार की निंदा की और उन्हें 7 अगस्त तक जवाब देने का निर्देश दिया। उत्तराखंड सरकार ने 31 मार्च को कहा था कि राफ्टिंग कैंप के लिए नए लाइसेंस जारी नहीं होंगे। इस पर नोटिस लेते हुए बेंच ने स्पष्ट किया कि नए राफ्टिंग शिविरों और नवीनीकरण को अगली सुनवाई तक अनुमति नहीं दी जाएगी।

पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय को राफ्टिंग शिविरों की एक्टिविटीज के नेचर पर रुख साफ करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान इंडियन असोसिएशन ऑफ राफ्टिंग आउटफिटर्स ने कहा कि वन (संरक्षण) कानून के अनुसार राफ्टिंग क्रियाकलापों को गैर वन क्रियाकलाप नहीं माना जा सकता। राफ्टिंग असोसिएशन ने 31 मार्च के उस आदेश में संशोधन की मांग की, जिसमें गंगा पर राफ्टिंग शिविरों के संचालन की इस आधार पर अनुमति दी गई कि राफ्टिंग सेशन सितंबर में शुरू होने वाला है। एनजीटी ऋषिकेश में राफ्टिंग शिविरों के अनियमित संचालन के खिलाफ एनजीओ 'सोशल एक्शन फॉर फॉरेस्ट ऐंड एनवॉयरनमेंट' की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।Courtesy: नवभारत टाइम्स


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