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#uttarakhand-culture

इस गीत मे एक पत्नी अपने पति को पहाड़ मे बेरोजगारी के कारण शहर मे जाने को कहती है और शहर की चकाचौंध मे चले जाने को कहती
पर पहाड़ प्रेमी पति कैसे वहाँ ना जाकर यही पहाड़ मे रहने के लिए कहता है चंद पंक्तियों के माध्यम से वर्णन करने का प्रयास किया है
मैं नी जानू छोड बे सुआ यो पहाड़ माया 
यई रूनी मयर पूरवजा,यई मेरी थाता
यई रुनी मयर भूली,यई मेरी माता
कै दे सुआ कैस के जाऊ छोड बे यो माया
मैं नी जानू छोड बे सुआ यो पहाड़ माया -2

हिमाला की कांठा छिन याँ, हरियाला पहाड़ा 
ऊँची नीची डांडिया मैं छिन रंगीलो मिजाता
कै दे सुआ कैस के जाऊँ छोड बे यो मिजाता
मैं नी जाऊँ छोड बे सुआ यो पहाड़ माया -2

रंग बिरंगी प्यूंली इथा, रंग बिरंगी काया 
कैस के छोडू त्यर संगा कैस के छोडू हाथा
कै दे सुआ कैस के जाऊँ छोड बै तेरी माया
मैं नी जानू छोड बे सुआ यो पहाड़ माया -2

यई रुनी गोलज्यू मयर यई रुनी गंगनाथा
पहाड़ा मे या गूँनी सैनिकों की गाथा
झोड,नयेली,पहेली आँखर की के बाता
कै दे सुआ कैस के जाऊँ छोड बे यो बाता
मैं नी जानू छोड बे सुआ यो पहाड़ माया-2

यई हूँनी कौण मादिरा कुलथ झिंगुरा
सिंगोडी की खुशबू या छू, नारंगी को स्वादा
कै दे सुआ कैस के जाऊँ छोड बे यो स्वादा
मैं नी जानू छोड बे सुआ यो पहाड़ माया -2

देवी देवता या रुनी छोड बे अपुण गृहजाता
येख महिमा गानी रि्षी मुनि अपारा
कै दे सुआ कैस के जाऊँ छोड बे यो स्वरगा
मै नी जानू छोड बे सुआ यो पहाड़ माया 
यो पहाड़ माया यो पहाड़ माया

( कुमाऊँनी मे माया का अर्थ प्रेम होता है)
- संदीप


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