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#uttarakhand-facts
खाना बनाया और खिलाया ...
द्वाराहाट विधानसभा यात्रा कई मायनो से खट्टे - मीठे अनुभवों से रूबरू करा गई। पहाड़ी गावो को करीब से जानने का मौका मिला। असगोली गांव के श्रद्धालुओं के साथ कुमाऊँ की काशी कहे जाने वाले विभाण्डेश्वर धाम तक 7 किलोमीटर लम्बी पैदल यात्रा की तो वही दूसरी तरफ माँ दूनागिरि के दरबार भी गया। बैसी ( सावन माह में 22 दिनों तक होने वाली पूजा - अर्चना ) में भुमिया देवता के मंदिर में आरती भी की। बिन्ता के भतौर गाँव में द्रोणाचार्य गऊ धाम की स्थापना के समय समर्थन और विरोध की राजनीति से भी सामना हुआ। पहाड़ी सभ्यता और संस्कृति का महत्त्व देखा असगोली गांव में। जहां लोगो को सामूहिक रूप से खाना बनाते और खिलाते देख लगा कि अभी भी आपसी सौहार्द जिंदा है । इसमें मैने भी भागीदारी की। भाई हीरा सिंह अधिकारी का आभार। उन्होंने अपने गांव में एक नामांकरण कार्यक्रम के दौरान ये सुहाने पल दिखाए , जिसमे सभी लोग आपस में मिलकर खाना बना रहे थे और बड़े प्यार से लोगो को खिला रहे थे। दिल्ली - नोएडा की बात करे तो अब हमारे यहाँ यह कल्चर लगभग समाप्त हो चूका है। लोग हलवाइयों ओए वैटरो के उप्पर निर्भर होते है। जबकि उनके घर - परिवार और सगे - संबंधी तमाशबीन बने रहते है


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