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#uttarakhandnews
देहरादून: 14 अगस्त, 2015


देहरादून: वन रैंक वन पेंशन की मांग पर जंतर-मंतर दिल्ली में धरना दे रहे पूर्व सैनिकों के साथ पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने से पूर्व सैनिक आहत हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और इसे लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। पूर्व सैनिकों ने बताया कि वन रैंक वन पेंशन की लड़ाई तकरीबन साढ़े तीन दशक पुरानी है। पिछले 62 दिन पूर्व सैनिक अपनी इस मांग को लेकर जंतर-मंतर पर डटे हैं। शुक्रवार को पुलिस व एनडीएमसी ने प्रदर्शनकारियों को जबरन वहां से हटाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि वयोवृद्ध पूर्व सैनिकों से यूं धक्का-मुक्की और तंबू-बैनर उखाड़ देना अनुचित और अशोभनीय है। इन युद्धवीरों ने अपनी जिंदगी देश के नाम कर दी। वह अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्वक ढंग से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह के व्यवहार की जितनी निंदा की जाए कम है। इस तरह के किसी भी कृत्य से सैन्य मनोबल टूटता है।
यह कदम बर्बरतापूर्ण और अलोकतांत्रिक है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। सरकार ने जो वादा पूर्व सैनिकों से किया है उसे पूरा किया जाना चाहिए।

ले. जनरल जीएस नेगी
इस तरह बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। सुरक्षा से भी जुड़ा मसला है तो बात की जा सकती थी। बहरहाल, अच्छी बात यह कि मामला अब सुलझ गया है।

ले. जनरल ओपी कौशिक
देश 1965 के युद्ध की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है। धरना स्थल पर ऐसे भी कई युद्धवीर बैठे हैं, जिन्होंने दुश्मनों के दांत खंट्टे किए। उनसे भी अशोभनीय व्यवहार किया गया।

ले. जनरल एमसी भंडारी
यह कार्रवाई अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व सैनिकों को हटाने के पीछे सुरक्षा कारण बताए गए। यदि ऐसा कुछ था तो सूचना पहले भी दी जा सकती थी। यूं जोर जबरदस्ती करना गलत है।

Courtesy: जागरण



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