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हरिद्वार: 18 अगस्त, 2015
अनूप कुमार सिंह, हरिद्वार: हरिद्वार को लेकर एक कहावत प्रचलित है 'जिसने देखा हरिद्वार, उसने छोड़ा घर बार।' अब हरिद्वार के वर्तमान हालात इस कहावत को झुठला रहे हैं। कुंभ और आपदा मद से करोड़ों खर्च होने के बाद भी शहर के हालात बद से बदतर हैं। शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त है। सीवरेज भी रामभरोसे चल रहा है। कई बस्तियों में सीवरेज उफन रहा है। कूड़ा निस्तारण योजना अपने हाल पर रो रही है, निर्मल गंगा के सरकारी दावों के बीच गंगा में गिर रहे दर्जनों नाले उसे आइना दिखा रहे हैं। थोड़ी बारिश में ही शहर के सभी प्रमुख इलाकों में जलभराव हो जाता है।
वर्ष 2010 में कुंभ निधि से शहर में तीन विभागों ने करीब 258 करोड़ के कार्य किए। इसमें लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण पर 117 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि पेयजल निगम ने 24 करोड़ की नई ओएचटी और पेयजल लाइन बिछायी। जल संस्थान ने 80 लाख में मेंटीनेंस और अन्य विकास कार्य किए। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई ने सीवरेज व्यवस्था और नालों को टेप करने पर करीब 37 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा बाद में आपदा मद से भी ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए शहर में 18 करोड़ के नाले बनाए। इतनी भारी भरकम राशि खर्च होने के बाद भी हरिद्वार के हालात सुधरे नहीं हैं। अपर रोड और मोती बाजार के हालत तो और भी खराब हैं। सघन इलाका होने के कारण यहां पर बरसात में नाले-नालियों का पानी सड़कों पर बहता ही है, साथ ही मां मंसादेवी पहाड़ी शिवालिक पर्वतमाला से गिरने वाला मलबा, दोनों मिलकर क्षेत्र में नारकीय स्थिति पैदा कर देता है।
क्या हैं जलभराव के कारण
-बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था
-नालों पर अतिक्रमण
-बिना योजना के बनाए गए नाले, नालों को बिना वजह मोड़ दे देना
-नालों की लगातार सफाई का न होना
-गंग नहर का स्तर नालों से ऊंचा होना
-संबंधित विभागों में तालमेल का अभाव होना
-नए बने नालों की इंटरलॉ¨कग का न होना
-नालों में कूड़ा-करकट का डाल देना, पॉलीथिन का नालों में फंसना
-शिवालिक पर्वत माला से आने वाला पानी
'जलभराव की समस्या से निजात बरकरार है। व्यापारियों को साल दर साल नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार कुछ नहीं कर रही है, व्यापारी समस्या सुनाए तो किसे सुनाए।'
मृदुल कौशिक, अध्यक्ष न्यू चंद्राचार्य चौक व्यापार मंडल।
'हर बरसात में व्यापारियों को जलभराव से नुकसान उठाना पड़ता है। जलभराव का ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। ये बेहद गंभीर मामला है, पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा।
श्रीराम आहुजा, व्यापारी नेता।
'इलाके की साफ-सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था पर कोई ध्यान न दिए जाने के कारण इलाके का यह हाल हुआ है। •ारा सी बारिश में पूरे क्षेत्र गंदगी और मलबे से भर जाता है। पहाड़ी से गिरने वाले मलबे को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। इससे जान-माल के नुकसान का हरदम खतरा बना रहता है।'
संजीव नैय्यर, शहर अध्यक्ष जिला व्यापार मंडल
'शहरी क्षेत्र में जलभराव की समस्या विकट है। इसकी कई सारी वजहें हैं। सरकार और भेल से सहयोग नहीं मिलने के कारण इसका स्थाई समाधान अब तक नहीं हो पाया है। कुछ ऐसा ही हाल अपर रोड और मोती बाजार का भी है। समस्या के स्थाई समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।'
मनोज गर्ग, मेयर
'शहरी क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, नालों-नालियों की सफाई का काम कराया जा रहा है। जलभराव की समस्या के स्थाई समाधान को योजना बनाई जा रही है। ड्रेनेज, सीवरेज और सड़कों की बदहाल स्थिति के संबंधित विभागों को कहा जा रहा है।'
विप्रा त्रिवेदी, मुख्य नगर अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट
Courtesy: जागरण



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