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देहरादून : 6 अगस्त, 2015

जब प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक ही वन्य जीवों का दुश्मन बन जाए तो फिर वन्य जीवों की रक्षा करेगा कौन? यह सवाल आज उत्तराखंड के सामने है।

2013 के तत्कालीन प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक एसएस शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने वन्य जीवों के दुश्मनों से मिलकर न सिर्फ अवैध शिकार की अनुमति दी बल्कि इस मामले में हो रही जांच भी प्रभावित करने की कोशिश की। इस बात का खुलासा अपर मुख्य सचिव एस. राजू की जांच रिपोर्ट में हुआ है।

इस खुलासे के बाद शर्मा के खिलाफ अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली 1968 के तहत कार्रवाई की संस्तुति की गई है। वहीं वन जीव अपराधियों से संलिप्तता के मामले में पुलिस की अनुसंधान शाखा से जांच कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। शर्मा वही अधिकारी हैं जिन्होंने केदारनाथ वन्य विहार के ऊ पर बिना एनओसी हेलीकॉप्टरों के उड़ान के संबंध में उप वन संरक्षक आकाश कुमार की रिपोर्ट दबा दी थी।
Courtesy: अमर उजाला




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