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#uttarakhandnews
देहरादून: 30 अगस्त, 2015
अगर 12 से 18 घंटे के बीच इंटरनेट के जरिये फ्रॉड कर खाते से निकाली गई रकम की शिकायत कर दी जाए तो पैसे वापस मिल सकते हैं। पुलिस के एक ई-मेल पर रकम ट्रांसफर करने वाली कंपनी उस पैसे को दूसरे खाते में जाने से रोक सकती है। इसी फार्मूले से साइबर थाना अब तक ठगी के शिकार लोगों के 5.5 लाख रुपये उनके खातों में वापस करा चुका है।

स्पेशल टास्क फोर्स के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते ने साइबर थाने की उपलब्धि को आधार बनाकर प्रदेश के सभी थानों को यह संदेश भेजा है कि यदि ऑनलाइन ठगी की शिकायत आती है तो बिना देर किए प्रकरण की जानकारी साइबर थाने को दी जाए, ताकि समय रहते कार्रवाई करके रकम को बचाया जा सके।

बढ़ रही इंटरनेट ठगी
बताया कि इंटरनेट के जरिये ठगी के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं, जिन्हें केवल लोगों को जागरूक करके रोका जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि डेबिट या क्रेडिट कार्ड के बारे में किसी को कोई जानकारी ना दें। बैंक स्तर पर इस तरह की कोई जानकारी नहीं ली जाती है।

एसएसपी दाते ने बताया कि इंटरनेट बैंकिंग में रकम ट्रांसफर करने के कई चरण होते हैं। अमूमन लोगों को यह जानकारी रहती है कि नेट से एक खाते से रकम दूसरे खाते में पहुंच जाती है। जबकि खाते से निकली रकम पहले पेमेंट गेटवे के पास आती है, (एक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजने वाली कंपनी) जहां से अगले 24 घंटे की अवधि में रकम स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी होती है।

कंपनी पुलिस के ई-मेल पर ऐसी रकम को आगे भेजने से रोक लेती है, जिससे पीड़ित की रकम मिल जाती है। इसके लिए जरूरी है कि 12 से 18 घंटे की बीच सूचना मिल जाए।
Courtesy: अमर उजाला


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