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#uttarakhandnews
देहरादून: 20 अगस्त, 2015

मित्रो आज ऑफिस से निकला तो याद आया की श्रीमती जी ने राखी पोस्ट करने को कहा है, मुख्या पोस्ट ऑफिस में बाइक पार्क की और डाकखाने वाला काम निपटाया, इस बीच बारिस तेज हो गयी. सोचा चलो कुमार स्वीट तक घूम कर आवु, वह पहुँचते ही नीचे बोर्ड पर नजर पड़ी जिसपर लिखा था इंदिरा अम्मा भोजनालय.
कई दिनों से हम खबर भी लिख रहे थे इस भोजनालय पर/ सिर्फ बीस रुपये की थाल पर सभी खबर लिख रहे है. वह पंहुचा तो मन हुवा देखा जाये कहा पर बना है भोजनालय/ तभी वहा गीता बिष्ट भी पहुंच गयी गीता को बताया तो उसने भी कहा चलो देखा जाये/ एक अजीब सा संकोच भी था की कोई परिचित न मिल जाये जो ये समझे देखो बीस रुपये का खाना खाने आ गए/ वह पहुंचे तो सब उ  कुछ उम्मीदों के बिपरीत था. बाहर चमचमाता सा बोर्ड देख कर ऐसा लग रहा था जैसे किसी महंगे रेस्टोरेंट में पहुंच गए हो. शीशे के दरवाजों के भीतर नजर दौड़ाई तो साडी टेबल फुल थी. ठीक -ठाक लोग वह बैठ कर खाना खा रहे थे./ मीनू पर नजर डाली तो रोटी की जगह आज पूरी थी साथ में चावल, छोले, सब्जी और हरी चटनी/ तभी एक पत्रकार साथी मनमीत रावत भी मिल गए भीतर गए तो वहा सफाई वाला फर्श पर पोछा लगा रहा था. बारिस की वजह से गीला हुवा फर्श फिर से चमचमाने लगा/ मनमीत ने बीस रुपये का टॉकन लिया और कहने का थाल लेकर टेबल पर आ गया.
अब तक इस सबसे सस्ते रेस्टोरेंट का गेटउप, वह बैठे मेरे स्टेटस के लोग और खाने का शानदार मीनू देख मेरे मन से भी ये संकोच खत्म हो गया था/ मीनू में पूरी देखकर मन ललचा गया/ हालाँकि भूख बहुत तो नहीं थी, लईकिन बारह बजे ही लंच लेने का प्लान बना, गीता ने दो टोकन लिए और थाल भी लेकर आ गयी. इस बीच कई और लोग भी आते रहे/ जैसे जैसे लंच टाइम हो रहा था लोग आते गए/ तभी वह कूचा चेनेल वाले भी आ गए और रूलक के अवधेश कौसल जी भी, वो लोगो से पूछने लगे की क्या इस थाल से पेट भर जायेगा,. किसी ने कहा हा सर बहुत अच्छा है तो किसी ने कहा थड़ा और होता तो भर जाता/
इसी बीच संचालको की और से आवाज आई की प्लीज जिन लोगो ने खाना खा लिया है वे टेबल खाली कर दे. हमने भी टेबल छोड़ी और कुमार स्वीट के पास आ गए. तभी दो पत्रकार साथी भी रेस्टोरेंट की तरफ से आते दिखे/ गैरोला जी और खालिद भाई. बात खाने की हुयी तो हमने भी बताया हम भी वही से आ रहे है.
चार पत्रकार मिल गए तो बातचीत का दायरा बढ़ा, खालिद भाई बोले यार और रेस्टोरेंट खुल गए तो होटल वालो का क्या होगा . तो गैरोला जी ने बोला भाई बात कुछ होटल और ढाबे वलु की नहीं है. उनमे खाना खाने वाले उन हजारु लोगो का फायदा भी तो देखो./
कुल मिलकर सरकार के इस प्रयास को सराहा जाना चाहिए. फ़िलहाल देहरादून में खुली इंदिरा अम्मा भोजनालय का फायदा पुरे परदेश के लोगो को मिलेगा. हर रोज देहरादून आने वालो को इतना सस्ता और अच्छा भोजन सायद ही कही मिले.. जरूरत है जल्दी इस तरह के और भी भोजनालय खोलने की|  Arjun Bisht Ghese Chamoli


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