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#uttarakhandnews
देहरादून: 20 अगस्त, 2015
आओ आप भी घी खाओ....! घी संग्राद पर दो जानी माणी हस्तियों के मुंह का स्वाद आप भी चखिए.
इस कार्यक्रम की शुरुआत 5 बजे होनी थी लेकिन झमाझम बारिश ने चारों ओर पानी ही पानी कर दिया था. मैं सुर सम्राट नरेंद्र सिंह नेगी जी, जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण, मसूरी के पूर्व विधायक व संस्कृति संवर्धन एवं मेला वर्गीकरण के अध्यक्ष या यूँ कहें संस्कृति विभाग के प्रतिनिधि जोत सिंह गुनसोला जी सभी साथ बैठे थे. वार्ता क्रम यूँ शुरू हुआ-
प्रीतम भरतवाण- भैजी अचाचकळई की बरखा छ आज होणी..? (भाई जी आज तो भयंकर बारिश हो रही है).
नरेंद्र सिंह नेगी- घी संगराद अर पाणी-पाणी(हँसते हुए) (घी संग्राद में पानी ही पानी)
जोत सिंह गुनसोला- हाँ भै अदरी ह्वेग्ये आज त, बकीबात (हाँ जी आज ज्यादा ही हो गया कुछ, बहुत ज्यादा)
नरेंद्र सिंह नेगी (हंसते हुए जोत सिंह गुनसोला जी से) - अरे भैजी घी की जगा डालडा संगरांद मनौन्दा त इन नि होंदु..तख द्याखदी आगास भी नि पछई सक्णु छ.(अरे भाई जी घी की जगह डालडा संग्राद मनाते, वहां देखो आसमान भी नहीं पचा पा रहा है.
(प्रीतम भारतवाण व जोत सिंह गुनसोला हँसते हुए) जोत सिंह गुनसोला-हाँ भैजी आपदा कभी भी ऐ सकद. सुलार संभाली राखा.(हाँ भाई जी आपदा कभी भी आ सकती है, सलवार सम्भाल कर रखिये.
प्रीतम भरतवाण- बल भैजी अब खा माछा...!(अब खाओ मछली)
नरेंद्र सिंह नेगी- डौन्खै..डौन्खा छन यख ता.पाणीम.!(मेंडक ही मेंडक के बच्चे है यहाँ पानी में)
जोत सिंह गुनसोला- भैजी जबरी ताचु नि तीडी भी ग्या...चासण गरम होणी द्या सब्र करा धौं...! (भाई जी अभी तापी भी नहीं और उबलने भी लगी, ...कड़ाई गर्म होने दो , सब्र कर थोडा.)
हंसी मजाक में इन शब्दों के गूढ़ पर जाईये..सच में मैं हंस हंसकर लोट-पोट हो गया. लेकिन बौंसर पर किस तरह डिफेन्स खेल रहे थे जोत सिंह गुनसोला..गजब कमाल हैं ये सब. Manoj Istwal




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