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12 ज्योतिर्लिंगों में 8वां ज्योतिर्लिंग कहलाने वाले जागेश्वर में आज भी 125 मन्दिर समूहों के प्रमुख मन्दिर में कुमाऊ के चन्द वंशज राजा दीपचन्द का अखण्ड दीप सहस्त्रों बर्षों से जल रहा है।
अपने पिता कल्याण चंद के अराजक शासन काल के पश्चात् अवयस्क राजा दीप चंद सन 1748 में राजगद्दी पर बैठे. वह बेहद दयालु मिलनसार और प्रजापालक राजा के रूप में उभरकर सामने आये उन्होंने सन 1748 से लेकर 1777 तक लगभग 29 बर्ष राज्य किया. कहा जाता है कि धार्मिक प्रवृति के होने के कारण पण्डे पुजारियों ने जमकर राजकोष लूटा उनके राजकाज में 36 जागीरें दान में दी गयी जोकि कुमाऊ के इतिहास में किसी राजा द्वारा दी गयी सबसे ज्यादा जीगीरें थी. जागेश्वर भी गूंठ में उन्ही के द्वारा दिया गया बताया जाता है. बताया जाता है कि इस काल में राजा का पूरा राजकाज जोशी ब्राहमणों के हाथ होने से कई निरंकुश फैसले भी लिए गए और कई कृत्य ऐसे भी हुए जो चंद वंशज के लिए दुस्वप्न जैसे हैं.
जागेश्वर में अष्ट धातु निर्मिंत राजा दीप चन्द 8वें ज्योतिर्लिंग के पृष्ठ भाग में दीप लिये खड़े हैं। यह दीप विगत 267 बर्षों से अखंड दीप के रूप में प्रज्वलित है. मंदिर के भट्ट पुजारी अपने को दक्षिण भारत से आये नम्बुरी ब्राह्मण मानते हैं. मंदिर के पुजारियों का कहना है क़ि यह दीप पहले राजा दीप चन्द के सिर पर विराजमान था लेकिन काल गति के साथ साथ दिया इनकी छाती तक आ गया है। मंदिर के पुरोहितों का मानना है क़ि जिस दिन यह दिया उनके पैरों तक़ पहुंच जाएगा तब पृथ्वी के कई भू भागों में प्रलय सम्भव है।
Manoj Istwal


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