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हरिद्वार : 5 अगस्त, 2015

इंडियन इस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (आईआईटी-रुड़की) के फर्स्ट इयर के 72 स्टूडेंट्स को पिछले महीने निष्कासित कर दिया गया था। पहली बार किसी एक बैच के सबसे ज्यादा संख्या में स्टूडेंट्स के खिलाफ यह ऐक्शन लिया गया। ये स्टूडेंट्स परीक्षा में न्यूनतम पासिंग ग्रेड पाने में भी नाकाम रहे थे। अब इन्हें एक मौका और दिया गया है। इन्हें अभी प्रोबेशन पर रखा गया है। यदि ये स्टूडेंट्स फर्स्ट इयर के सारे पेपर्स इस बार भी क्लियर नहीं करते हैं और क्यूम्यलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज(सीजीपीए) 5.0 से ऊपर (10 के स्केल पर कम से कम 55 पर्सेंट) नहीं लाते हैं तो ये फेल होंगे और अगले साल फिर से निष्कासित कर दिए जाएंगे। ऐसा कोई कैंपस नहीं है जहां इस तरह से नतीजे के लिए शर्त रखनी पड़ी हो।

आईआईटी के प्रफेसर, स्टूडेंट्स और प्रशासक से बातचीत के जरिए इंडियन एक्सप्रेस ने एक पड़ताल की। इस पड़ताल के जरिए कई चीजें सामने आईं। ज्यादातर ये स्टूडेंट्स रिजर्व कैटिगरी (एससी, एसटी और ओबीसी) से हैं। इन्हें आईआईटी-जी 2014 (अडवांस्ड) की मुश्किल प्रवेश परीक्षा में संबंधित कैटिगरी में औसत रैंक मिले थे। जब इन्होंने आईआईटी में पढ़ाई शुरू की तो कई वजहों से लड़खड़ाने लगे। कमजोर इंग्लिश (लिखने और बोलने दोनों में) के कारण इनका आत्मविश्वास लगातार फिसलता गया और कम्युनिकेशन स्किल के मामले में भी ये पिछड़ते गए। इस वजह से कैंपस के माहौल में इन्हें खुद को समाने या फिट करने में बहुत मुश्किल होती है। आईआईटी के एक प्रफेसर ने कहा, 'यह एक अहम सबक है कि आईआईटी में स्टूडेंट्स बाढ़ की तरह आ रहे हैं लेकिन कैंपस निर्माण और फैकल्टी आकर्षित करने की प्रक्रिया लगातार कमजोर पड़ रही है।

रुड़की में फर्स्ट इयर के स्टूडेंट्स की जांच के ऑफिशल रिकॉर्ड कुछ इस तरह हैं- कुल 1002 स्टूडेंट्स हैं। आईआईटी रूड़की में जो छात्र फेल हुए हैं उनमें 90 पर्सेंट रिजर्व कैटिगरी एससी, एसटी और ओबीसी से हैं। इनमें से 49 ऐसे स्टूडेंट्स हैं जिनका ऐडमिशन सबसे अच्छे माने जाने वाले स्ट्रीम में हुआ। इनमें से 3 कंप्यूटर सायेंस, 10 इलेक्ट्रॉनिक्स, 12 इलेक्ट्रिकल, 7 केमिकल, 3 मेकेनिकल और सबसे ज्यादा 14 लोगों का सिविल इंजिनियरिंग में ऐडमिशन हुआ था। इसका मतलब यह हुआ कि इन छात्रों ने अपनी कैटिगरी (जेनरल, एससी, एसटी और ओबीसी) में बेहतर किया था तभी इन विभागों में दाखिला मिला।

आईआईटी जी 2014 में ऑल इंडिया स्तर पर टॉप 50 में एक भी एससी कैटिगरी का स्टूडेंट नहीं था। ऐसा तब है जब 2014 में 2,029 एससी कैटिगरी के स्टूडेंट्स का आईआईटी में दाखिला हुआ। दूसरी तरफ एसटी कैटिगरी में इन्होंने टॉप 100 में स्कोर किया। 2014 में 856 एसटी कैटिगरी के स्टूडेंट्स का आईआईटी में दाखिला हुआ है। आईआईटी रूड़की में फेल किए गए 72 छात्रों में जनरल कैटिगरी के वे स्टूडेंट्स हैं जिनका रैंक 3,500 और 7,000 से ऊपर था। इसमें बस एक का रैंक 1,500 के करीब था। उस साल जनरल कैटिगरी में अंतिम 9,209 रैंक वाले का आईआईटी में ऐडमिशन हुआ था। आईआईटी रूड़की के डायरेक्टर प्रदीप बनर्जी ने कहा कि पूरे कैरिकुलर बोर्ड में इन 72 का बेहद खराब प्रदर्शन रहा।

आईआईटी का कहना है कि स्टूडेंट्स को सस्पेंड करना कोई आसान फैसला नहीं है। आईआईटी रूड़की के डेप्युटी डायरक्टर विनोद कुमार का कहना है, 'हर साल, हमलोग के पास कुछ वैसे स्टूडेंट्स आते हैं जो जो इंस्टिट्यूट में चार से छह साल गुजारने के बाद बिना डिग्री लिए घर चले जाते हैं। हमलोग के पास फिर उनके अभिभावक आते हैं और कहते हैं कि जब आपको लग रहा था कि ये ठीक से नहीं कर पा रहे हैं तो आपने बताया क्यों नहीं? अपने जीवन का 6 साल इन्होंने बर्बाद क्यों किया?'

हालांकि ज्यादातर प्रभावित छात्रों के लिए निष्कासन सदमा पहुंचाने वाला होता है। कुमार ने कहा कि स्टूडेंट्स को हर कदम पर चेताया जाता है। ये मिड और ऐंड-सेमेस्टर एग्जाम में फेल हो जाते हैं। कुमार ने कहा कि इस बार छात्रों की संख्या चौंकाने वाली है लेकिन आईआईटी रुड़की में छात्रों का निष्कासन कोई पहली बार नहीं हुआ है। 2014 में फर्स्ट इयर के 12 छात्रों को सस्पेंड किया गया था क्योंकि ये भी परीक्षा में न्यूनतम मार्क्स लाने में नाकाम रहे थे।

आआईआईटी रुड़की के डीन ऑफ अकेडमिक्स प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि इन स्टूडेंट्स के साथ ज्यादा दिक्कत सायेंस और इंजिनियरिंग में नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरा सच नहीं है। इनका सीजीपीए पांच से भी कम है। ज्यादातर प्रफेसरों ने कहा कि इन छात्रों में एप्टिट्यूड सबसे बड़ी बाधा है। अग्रवाल ने कहा, 'यदि एक स्टूडेंट फिजिक्स में बढ़िया है तो वह इंग्लिश में फिसड्डी है। यदि वह इंग्लिश में भी ठीक होता तो उसके लिए सीजीपीए में पांच से ऊपर लाना कोई बड़ी बाधा नहीं होती। सीजीपीए में ये पांच से कम इसलिए पा रहे हैं कि ये ठीक से मेहनत नहीं करते।'

फर्स्ट सेमेस्टर में सात पेपर्स होते हैं, जिनमें कम से कम चार- इंग्लिश, एथिक्स, सेल्फ अवेयरनेस, मैथ्स, इन्वाइरनमेंटल स्टडिज सभी डिपार्टमेंट्स में कॉमन होते हैं। इसके अलावा जो खास डिपार्टमेंट के लिए खास सब्जेक्ट्स हैं वे भी बेसिक होते हैं। इन सब्जेक्ट्स को समझने के लिए पहले विशेष ज्ञान की जरूरत नहीं है। बनर्जी से पूछा गया कि गलत क्या हो रहा है? उन्होंने कहा, 'इन्हें ये पता नहीं है कि यहां स्टूडेंट्स गलाकाट प्रतिस्पर्धा को पास करने के बाद आए हैं। अब इन्हें दोबारा मौका दिया गया है। हम इनकी समस्याओं को और समझने की कोशिश करेंगे। ये स्टूडेंट्स इसलिए घटिया प्रदर्शन करते हैं क्योंकि फर्स्ट इयर को यूं ही मजाक में उड़ा देते हैं।'

ज्यादातर प्रफेसरों ने इस बात को स्वीकार किया कि फर्स्ट इयर में ये स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई पर फोकस नहीं होते। खास कर तब जब ये 12वीं में किताबी कीड़ा और कोचिंग इंस्टिट्यूट्स से मुक्त होकर यहां आते हैं। इसके अलावा वे उपलब्धि और अपेक्षा के दबाव में भी होते हैं। आईआईटी रुड़की के रजिस्ट्रार प्रशांत गर्ग ने कहा, 'एक बार जब कोई स्टूडेंट इस कैंपस में आ जाता है तो हमारे लिए सभी एक जैसे हैं। इसका कोई मतलब नहीं है कि किसका बैकग्राउंड क्या है और कौन कोटे से आया है। सीजीपीए में आपको न्यूनतम पांच मार्क्स तो लाने होंगे। हम इसे और कम नहीं कर सकते।'

एक फेल स्टूडेंट ने बताया, 'लाइफ को थोड़ा सिंपल लिया।' यह स्टूडेंट बिहार के भागलपुर का है। इसके पिता पुलिस में हैं और मां होममेकर। वह निष्कासन से बहुत दुखी हुआ। बिहार स्कूल बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में उसका सायेंस में 96 पर्सेंट मार्क्स था। 12वीं में इसे 70 पर्सेंट मार्क्स मिले थे। इसके बाद उसने कोटा में एक साल रहकर तैयारी की। आईआईटी की ओबीसी कैटिगरी में उसे 1,206 रैंक मिला। कुल 3,490 ओबीसी स्टूडेंट्स को आईआईटी में दाखिला मिला था। आईआईटी में एक साल बाद इसे सीजीपीए में 4.92 मिला जो कि पासिंग पॉइंट 5 के बिल्कुल करीब है। फर्स्ट इयर में फेल होने के बाद उस छात्र का कहना है कि मैंने आईआईटी एंट्रेंस एग्जाम क्रैक किया है इसका मतलब टैलंट तो है।

उस छात्र ने कहा, 'इंग्लिश मेरी सबसे बड़ी कमजोरी थी। जियोमेटिक्स प्रैक्टिक्लस में 25 में 23 मिले लेकिन लिखित एग्जाम में 100 में 8 अंक मिले। इसका साफ मतलब है कि हम इंग्लिश में एक्सप्रेस नहीं कर पा रहे हैं।
Courtesy: नवभारत टाइम्स



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