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रुद्रप्रयाग: 2 सितम्बर , 2015
मजदूरों का एक झुंड काम से थककर चाय की चुस्कियां लेते हुए कुछ देर आराम कर रहा है। केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य में लगे हुए ये मजदूर जमीन खोदने और पत्थर उठाने में लगी मेहनत के बाद थक गए हैं। आसपास भूतों की कहानियां आम हो चली हैं।

मजदूर भी ऐसी कई कहानियां सुनकर डरे हुए हैं। कई तो इतना डर गए हैं कि काम छोड़कर लौट जाना चाहते हैं। गर्म चाय की प्याली जैसे ही सबमें बंटती है, इनमें से एक मजदूर जो कि नौकरी की तलाश में यहां नेपाल से काम करने आया है, कहता है, 'यहां कई जगह चलते हुए मुझे डर लगता है। खास तौर पर रात के समय कहीं आते-जाते हुए मेरे रौंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसा लगता है कि हर परछाईं में से कई भूत बाहर निकल कर झांक रहे हैं।

केदारनाथ में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य में हजारों की तादाद में लोग काम कर रहे हैं। भूतों की कहानियां सुनकर वे इतना डर गए कि काम जारी रखने के लिए ना केवल उन्हें मनाना पड़ा, बल्कि हेलोवीन की थीम पर आयोजित एक पार्टी भी आयोजित की गई ताकि उनके अंदर से भूत का डर निकल जाए।

 जून 2013 में आई आपदा में यहां हजारों की तादाद में लोग मारे गए थे। यहां काम करने वाले कई मजदूर बताते हैं कि जब 2014 में वे पहली बार यहां काम करने आए थे तब अक्सर ही उन्हें अजीब सा महसूस हुआ करता था। उन्हें ऐसा लगता था कि मरे हुए लोगों की आत्माएं वहां मौजूद हैं।

 नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ मााउंटेनियरिंग के कर्नल अजय कोठियाल कहते हैं कि भूतों का डर एक बड़ी दिक्कत के तौर पर सामने आ रहा है। वह यहां पुनर्निर्माण का काम देख रहे हैं। वह बताते हैं, 'कई मजदूर, खास तौर पर रामबाड़ा इलाके में काम करने वाले मजदूर बहुत डरते हैं। हमारी टीम के सदस्यों को अक्सर ही उनके साथ बैठकर उनसे बात करनी पड़ती है और उन्हें समझाना पड़ता है ताकि उनके अंदर बैठा डर दूर हो सके। कई मजदूर तो यहां काम छोड़कर चले जाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि मरे हुए लोगों की आत्माएं उन्हें परेशान करेंगी।' 
Courtesy: नवभारत टाइम्स


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