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देहरादून : 30 सितम्बर , 2015

उत्तर प्रदेश के अधीन उत्तराखंड की सिंचाई संपत्तियों पर अब जल्द ही राज्य का स्वामित्व होगा। उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल मंडल की 37 नहरों पर पूर्ण अधिकार मिलेगा। 25 फीसदी सिंचाई संपत्ति भी उत्तराखंड सिंचाई विभाग के नाम होगी। इसके लिए दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों ने संपत्ति बंटवारे की कार्रवाई शुरू कर दी है। 23 सितंबर को कुमाऊं के ऊधमसिंह नगर, चंपावत जिले और यूपी के बरेली मंडल, मुरादाबाद जिले के सिंचाई विभाग के अधिकारियों के बीच बैठक में संपत्तियों के हस्तांतरण पर सहमति भी हो गई है।

उत्तर प्रदेश से अलग होकर गढ़वाल व कुमाऊं मंडल के साथ एक नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य बना। लेकिन, राज्य की भौगोलिक सीमा में स्थित सिंचाई संपत्तियों को नए राज्य को देने के बजाय उसे उत्तर प्रदेश शासन के ही अधीन रखा गया। जिस पर आज भी उत्तर प्रदेश का ही स्वामित्व है। इसको लेकर दोनों राज्यों के बीच विवाद चल रहा था। इसको लेकर दो फरवरी को मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश और मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन के बीच यूपी निवास दिल्ली में बैठक हुई थी। जिसमें उत्तराखंड राज्य में स्थित सिंचाई संपत्तियों पर आपसी सहमति से विवाद सुलझाए गए।

उधर, ऊधमसिंह नगर व चंपावत जिले के नोडल अधिकारी सिंचाई ईई संजय राज ने बताया कि 23 सितंबर को बरेली में ऊधमसिंह नगर, चंपावत जिले और यूपी के बरेली मंडल, मुरादाबाद जिले के अधिकारियों के बीच बैठक में संपत्तियों के हस्तांतरण पर लिखित सहमति बनी है। उन्होंने बताया कि दोनों राज्यों की सरकारों के बीच फैसले के तहत यूपी के अधीन उत्तराखंड की भौगोलिक सीमा में अव्यवस्थित हरिद्वार जिले की 28 नहरें व ऊधम सिंह नगर की 9 नहरों पर उत्तराखंड राज्य सरकार का स्वामित्व होगा। इसी तरह से यूपी के भौगोलिक सीमा में स्थित मुरादाबाद की आठ नहरें जो केवल यूपी को सिंचित करती हैं, उन्हें यूपी सरकार को अनुरक्षण के लिए दी जाएंगी। इसके अलावा 25 फीसदी भवन, खाली व अनुपयुक्त भूमि भी राज्य को हस्तांतरित होगी। उन्होंने बताया कि संपत्तियों के बंटवारे की कार्रवाई शुरु हो गई है। जल्द ही दोनों राज्यों के विभागों के अधिकारियों की संयुक्त टीम संपत्तियों का भौतिक सत्यापन करेगी और फिर संपत्ति चिन्हित होने के बाद शासनादेश जारी होगा।
Courtesy: अमर उजाला


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