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नैनीताल: 10 सितम्बर , 2015

नर्सों की हड़ताल के मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए उत्तराखंड नर्सेज सर्विस एसोसिएशन को विशेष संदेश वाहक से नोटिस भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार को इस संबंध में 24 घंटे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तिथि नियत की है।

मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की अधिवक्ता लता नेगी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि प्रदेश के अस्पतालों में कार्यरत सरकारी नर्सेज सात सितंबर से ग्रेड पे बढ़ाने के लिए हड़ताल पर हैं।

आंदोलनरत नर्सों ने 10 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। चेतावनी दी है कि ग्रेड पे की मांग पूरी न होने तक वे हड़ताल पर रहेंगी।


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याची का कहना था कि नर्सों की हड़ताल पर चले जाने से प्रदेश के कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों को खासा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल की वजह से कई मरीजों की मौत भी हो गई है।

गर्भवतियों को प्रसव के लिए प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ रहा है। गरीब मरीजों के पास इतना पैसा नहीं है जो वह प्राइवेट अस्पताल को दे सकें।

याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड गवर्नमेंट सर्वेंट कंडक्ट रूल्स 2002 के नियम 22 के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकता है। पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने उत्तराखंड नर्सेज सर्विस एसोसिएशन को विशेष संदेश वाहक से नोटिस भेजने के निर्देश दिए हैं।
Courtesy: अमर उजाला



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