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देहरादून: 10 सितम्बर , 2015

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की पहल पर आयोजित हिमालय दिवस पर बुधवार को प्रसिद्घ पर्यावरणविद और चिपको नेता

सुंदरलाल बहुगुणा ने स्कूली बच्चों व उपस्थित लोगों को 'हिमालय बचाओ' की शपथ दिलाई</a>। शपथ लेने वालों में मुख्यमंत्री हरीश रावत और शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी भी शामिल थे। शपथ लेने के बाद हिमालय बचाओ जागरुकता रैली को भी रवाना किया गया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि अभी तक हिमालय संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास शोध संस्थानों तक सीमित थे, लेकिन अब इन्हें जनअभियान का रुप दिया गया है। उन्होंने कहा, 'हमने संकल्प लिया है कि हमारी नीतियों का केंद्र हिमालय होगा। आर्थिक विकास व रोजगार को प्रकृति के साथ जोड़ना होगा।'

 इस संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दिनों हरेला के तहत वृक्षारोपण का इतना बड़ा अभियान चलाया गया, जिसमें महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वन पंचायतों को राज्य का एक अनूठा तंत्र बताते हुए रावत ने कहा कि वन पंचायतों के जरिए हिमालय संरक्षण को मुहिम का रुप देने के लिए उनके चुनाव करवाए जा रहे हैं और उम्मीद है कि इसमें 60 फीसदी महिलाएं निर्वाचित होकर आएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिरुल यानी चीड़ की सूखी पत्तियों के उपयोग के लिए भी योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत पहाड़ों में बिखरे पड़े कम से कम 20 प्रतिशत पिरुल का उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

रावत ने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए हम सभी को मिलकर सकारात्मक मुहिम चलानी चाहिए ताकि उत्तराखंड की आवाज पूरी दुनिया तक पहुंच सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा, पर्वतारोही हर्षवंती बिष्ट, वैद्य बालेंदु तथा अन्य लोगों को सम्मानित भी किया
Courtesy: नवभारत टाइम्स


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